नेपाल बाढ़ संकट: भारत ने बढ़ाई मदद के हाथ, भारी तबाही के बाद भेजी राहत सामग्री.

Praggya Singh sabal1 September 20263 min read32 viewsWorld
नेपाल बाढ़ संकट: भारत ने बढ़ाई मदद के हाथ, भारी तबाही के बाद भेजी राहत सामग्री.

पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भारी बारिश ने तहलका मचा दिया है। इस आपदा के कारण आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और चारों तरफ बर्बादी का मंज़र दिखाई दे रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने पड़ोसी और पुराने दोस्त नेपाल की मदद के लिए तुरंत हाथ आगे बढ़ाए हैं ताकि संकट में फंसे लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके।

भारी तबाही और जान-माल का नुकसान

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आए भीषण फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। National Disaster Risk Reduction and Management Authority (NDRRMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 तक इस आपदा में कम से कम 987 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, 1,473 लोग घायल हुए हैं और 3,916 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के पानी ने लोगों के आशियाने, स्कूल, अस्पताल और बड़े पुलों समेत तमाम जरूरी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया है। Ministry of Physical Infrastructure and Transport के अनुमान के अनुसार, केवल सड़कों और पुलों को ही 200 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। वहीं, National Planning Commission का मानना है कि इस पूरी आपदा से देश की कुल अर्थव्यवस्था को 600 से 700 अरब नेपाली रुपये के बीच का भारी चूना लगा है।

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राहत और बचाव कार्य और सप्लाई चेन पर असर

हालात से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने अपने करीब 19,000 सुरक्षा कर्मियों और 16 हेलीकॉप्टरों को जमीन पर उतार दिया है, जो लगातार खोज, बचाव और मेडिकल राहत पहुंचाने के कामों में जुटे हुए हैं। इस बारे में अधिक जानकारी नेपाल के विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में साझा की गई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण चीन की सीमा से जुड़े व्यापारिक रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं। इस वजह से लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर के चीनी सामान को अब भारतीय बंदरगाहों के रास्ते घुमाकर लाना पड़ रहा है। इस बड़े बदलाव के कारण माल पहुंचने में 20 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है और व्यापार की लागत में लगभग 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। इसके साथ ही, UNICEF की रिपोर्ट के अनुसार इस आपदा की वजह से 17,000 से अधिक बच्चे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

भारत की तरफ से लगातार मिल रही मदद

इस विकट परिस्थिति में भारत ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए तुरंत सहायता पहुंचाई है। भारत ने 26 अगस्त को ही 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत यानी HADR सामग्री नेपाल भेज दी थी। इसके ठीक अगले दिन यानी 27 अगस्त को राहत सामग्री की दूसरी खेप भेजी गई, जिसमें 37.5 टन भोजन और जरूरी दवाइयां शामिल थीं। इस भारतीय सहायता के बारे में विस्तार से विदेश मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने नेपाल को हरसंभव मदद देने का पूरा भरोसा दिलाया है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी यह स्पष्ट किया है कि भारत सरकार नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है।

सीमावर्ती राज्यों में हाई अलर्ट और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के पड़ोसी राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को सीमा से लगे इलाकों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी NDRF को भी पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है, जिसकी पुष्टि PIB की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में की गई है। भारत के तकनीकी और बचाव दलों ने अब तक नेपाल में फंसे 158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इसके साथ ही भारतीय टीमें काठमांडू में फॉरेंसिक सपोर्ट देने और हाइड्रोपावर टनल साइटों पर जाकर लोगों को बचाने जैसे विशेष अभियानों को अंजाम दे रही हैं।

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