नेपाल बाढ़ का कहर, मरने वालों का आंकड़ा 1000 के पार, करीब 4 हजार लोग अभी भी लापता.

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को माउंट लांगटांग लिरुंग के ग्लेशियर टूटने की वजह से आई भयानक बाढ़ और तबाही ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या अब 1,000 के आंकड़े को पार कर गई है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य का काम युद्ध स्तर पर जारी है और यह इसका सातवां दिन चल रहा है। इस आपदा से प्रभावित इलाकों में हालात बहुत ज्यादा गंभीर बने हुए हैं और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आधिकारिक आंकड़े और लापता लोगों की तलाश
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग एजेंसियों ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि बाढ़ के पानी से अब तक 1,010 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं, नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA ने 1,003 मौतें दर्ज की हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक नेपाल के अंदर ही 987 लोगों की जान जा चुकी है। लापता लोगों की कुल संख्या 3,916 है, जिनकी तलाश के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स के लगभग 21,000 जवान दिन-रात जमीन पर डटे हुए हैं।
लापता लोगों के आधिकारिक विवरण के अनुसार, अकेले नुवाकोट में 1,558 लोग लापता हैं, रसुवा में 865 लोग गायब हैं, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 639 कर्मचारी, 583 विदेशी नागरिक और विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे 164 नेपाली नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा चीन की तरफ से भी भारी नुकसान की खबर है, जहां अधिकारियों ने 16 लोगों की मौत की पुष्टि की है और 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बचाव दलों ने अब तक कुल 11,814 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जिनमें से 2,740 लोग नेपाल सेना की टीमों की देखरेख में अपना इलाज करवा रहे हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिश
बचाव दलों द्वारा बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के अंदर फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। इस काम में भारत, चीन और कोरिया गणराज्य से आई विशेष सुरंग इकाइयों (स्पेशल टनल यूनिट्स) की भी मदद ली जा रही है। आपदा की इस भीषण स्थिति को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने जलवायु परिवर्तन से देश के संवेदनशील इलाकों पर पड़ने वाले खतरे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। वहीं, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन करने वाले देशों से इस संकट के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की औपचारिक अपील की है।
शवगृहों के पूरी तरह भर जाने की वजह से स्थानीय प्रशासन को मजबूरन बरामद हुए शवों के डीएनए सैंपल सुरक्षित रखकर उनका अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है, ताकि भविष्य में उनकी पहचान की जा सके। जो परिवार अपने लापता या प्रभावित सदस्यों की जानकारी जुटाना चाहते हैं, वे महाराजगंज स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल या फिर स्थानीय जिला पुलिस कार्यालयों से संपर्क कर सकते हैं। आप इस संबंध में विस्तृत जानकारी आधिकारिक नेपाल विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर भी देख सकते हैं।