Nepal Flood Update: नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या हुई 1,369, भारत ने भेजा आठवां राहत विमान.

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की वजह से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और अब तक 1,369 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल के National Disaster Risk Reduction and Management Authority (NDRRMA) की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह आपदा 26 अगस्त 2026 को लैंगटांग लिरुंग में ग्लेशियर टूटने के बाद शुरू हुई थी। इस भयानक तबाही के पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पा रहे हैं और भारी तबाही का मंजर चारों तरफ दिखाई दे रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप नेपाल विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
लापता लोगों की तलाश और राहत कार्य
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी 5,132 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 600 विदेशी नागरिक शामिल हैं जो दुनिया के 35 अलग-अलग देशों से ताल्लुक रखते थे। इस आपदा के दौरान अब तक सेना और बचाव टीमों ने 13,646 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नेपाल सरकार के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 387.54 अरब नेपाली रुपये यानी करीब 2.64 अरब अमेरिकी डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।
भारत सरकार की तरफ से लगातार मिल रही मदद
नेपाल के इस मुश्किल समय में भारत ने अपनी दोस्ती निभाते हुए मानवीय सहायता जारी रखी है और काठमांडू में अपना आठवां भारतीय वायुसेना का विमान उतार दिया है। इस विशेष विमान के जरिए भारत ने 35 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है, जिसमें डीएनए किट, पानी निकालने वाले पंप, पोर्टेबल जनरेटर और मिट्टी तथा सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के उपकरण शामिल हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रेस रिलीज में देखी जा सकती है। इस आठवीं खेप के आने के बाद भारत की तरफ से अब तक कुल 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री आठ विशेष उड़ानों के जरिए नेपाल पहुंचाई जा चुकी है।
विशेषज्ञों की तैनाती और संयुक्त राष्ट्र की अपील
राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए भारत के 54 विशेषज्ञ कर्मचारी इस वक्त नेपाल में तैनात किए गए हैं जो फॉरेसिंक और बचाव कार्यों में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रहे हैं। भारतीय फोरेंसिक टीमें काठमांडू की दो अलग-अलग लैब में लगातार डीएनए सैंपल की जांच करने में जुटी हुई हैं ताकि पीड़ितों की पहचान की जा सके। इस बारे में और अधिक जानकारी ReliefWeb की रिपोर्ट में उपलब्ध है। वहीं दूसरी तरफ, इस भयानक मानवीय संकट से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक फ्लैश अपील जारी की है, जिसके तहत साल 2026 के अंत तक 84,270 प्रभावित लोगों की मदद के लिए 4.96 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाए जाने की मांग की गई है।