नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर ग्लेशियर फटने से मरने वालों की संख्या हुई 734

Sushma Kumari30 August 20263 min read19 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर ग्लेशियर फटने से मरने वालों की संख्या हुई 734

नेपाल और तिब्बत बॉर्डर के पास हुए ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद आई भयानक बाढ़ और मूसलाधार बारिश से हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA के अनुसार, इस भयंकर आपदा में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर अब 734 तक पहुंच गया है। बाढ़ और लैंडस्लाइड की वजह से पूरे इलाके में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और सरकार की तरफ से लगातार राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं।

राहत और बचाव कार्य जारी, हजारों लोग अब भी लापता

आपदा के पांच दिन बीत जाने के बाद भी नेपाल में बचाव अभियान पूरी तेजी के साथ जारी है। अभी भी लगभग 2,498 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 933 लोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल यानी IPPAN की रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले नौ अलग-अलग पनबिजली परियोजनाओं से 537 कर्मचारी लापता हैं। खासकर त्रिशुली 3A और 3B प्रोजेक्ट साइट्स पर स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है, जहां मजदूरों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। नेपाल पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार इस आपदा में अब तक 242 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि कुल 2,301 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है या उनका इलाज किया जा रहा है।

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प्रशासन की चेतावनी और नेपाली सेना का अभियान

रविवार सुबह 30 अगस्त 2026 को NDRRMA ने भोटेकोशी नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद एक हाई अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों के आसपास रहने वाले आम नागरिकों से बेहद सावधानी बरतने की अपील की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाली सेना ने अपने 8,300 से ज्यादा जवानों को मैदान में उतारा है और अकेले रसुवा जिले से रविवार सुबह 7 बजे तक 2,697 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हालांकि, लगातार हो रही भारी बारिश और पानी का स्तर बढ़ने की वजह से त्रिशुली 3A टनल के पास चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोकना भी पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय मदद और कूटनीतिक कदम

ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने पुष्टि की है कि सुरंगों के पास रेस्क्यू का काम अभी भी लगातार जारी है। इस आपदा से निपटने के लिए नेपाल सरकार को दुनिया भर के देशों से मदद मिलनी शुरू हो गई है। अमेरिका ने नेपाल को 3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने का ऐलान किया है, जबकि भारत सरकार ने राहत सामग्री के साथ-साथ विशेष टनल रेस्क्यू यूनिट्स को नेपाल भेजा है। इसके अलावा चीन ने भी वित्तीय सहायता और सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया कराई हैं ताकि बाढ़ के कारण बनी झीलों पर नजर रखी जा सके। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने और रियल-टाइम हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने को लेकर सहमति बनी है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नेपाल सरकार के आधिकारिक विदेश मंत्रालय पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 261 विदेशी नागरिकों को भी बचाया जा चुका है, लेकिन भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, अमेरिका, इटली और ओमान के लगभग 320 पर्यटक अभी भी संपर्क से बाहर हैं जिनकी तलाश की जा रही है।

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