नेपाल में भयानक बाढ़ से तबाही, 788 लोगों की मौत और 2,500 से ज्यादा लोग लापता, बचाव अभियान जारी.

नेपाल में आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ से हालात बेहद खराब हो चुके हैं और राहत व बचाव कार्य अब अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस भयंकर आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 तक पहुंच गई है। इसके अलावा 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में प्रशासन लगातार जुटा हुआ है। यह प्राकृतिक आपदा 26 अगस्त 2026 को शुरू हुई थी, जब हिमालयी क्षेत्र में आए एक भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण भयंकर तबाही मची थी। इस घटना को 5.2 तीव्रता के भूकंपीय गतिविधि के रूप में दर्ज किया गया था, जिसके बाद भेतकोशी और त्रिशूल नदियों में पानी का तेज बहाव और मलबा आने से निचले इलाकों में पानी भर गया था। इस बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb की रिपोर्ट से भी समझी जा सकती है, जबकि मूल आंकड़े ANI News के माध्यम से सामने आए हैं।
विभिन्न जिलों में हुआ भारी नुकसान
इस आपदा की वजह से नेपाल के कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जहां जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 264 मौतें चितवन जिले में दर्ज की गई हैं। इसके बाद नवालगढ़ पूर्व में 194 लोगों की जान गई है, नवालगढ़ पश्चिम में 120 मौतें हुई हैं, गोरखा में 58 लोग मरे हैं, नुवाकोट में 52, धाडिंग में 50, तनहुन में 37 और रसुवा जिले में 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल के अलावा पड़ोसी देश चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी इस आपदा के कारण 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। इस तरह से इस पूरे क्षेत्रीय हादसे में कुल मिलाकर 804 लोगों की जान जा चुकी है और 3,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों की इस लंबी सूची में 589 विदेशी नागरिक और उनके साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा सुरक्षा बलों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिसमें 45 नेपाल आर्मी के जवान, 27 नेपाल पुलिस के अधिकारी और सशस्त्र पुलिस बल के 13 सदस्य भी शामिल हैं जो लापता बताए जा रहे हैं।
बुनियादी ढांचे को भारी क्षति और राहत कार्य
नेपाल में इस भीषण बाढ़ की वजह से देश का बुनियादी ढांचा बुरी तरह तबाह हो गया है। पूरे इलाके में कुल 32 पुल और लगभग 25 मील लंबी सड़कें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं, जिससे यातायात व्यवस्था ठप पड़ी है। इसके साथ ही, अलग-अलग 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले 934 श्रमिक भी अब तक लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनलाल ने इस बात पर जोर दिया है कि मलबे और पानी के बीच फंसे जीवित बचे लोगों को ढूंढना इस वक्त देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की गुहार लगाई गई है ताकि विशेष सुरंग बचाव उपकरण, डीएनए विश्लेषण क्षमताएं और मुर्दाघर के लिए रेफ्रिजरेटर यूनिट्स जल्द से जल्द मंगाई जा सकें। प्रशासनिक अमले की तमाम मुश्किलों के बावजूद अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि, मौसम के खराब मिजाज के बीच बचाव कार्य को आगे बढ़ाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए NDRRMA ने भेतकोशी नदी के आसपास के इलाकों में फिर से बाढ़ आने की चेतावनी जारी की है, और नदी के किनारे रहने वाले सभी स्थानीय लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।