नेपाल में बाढ़ का कहर, 469 लोगों की मौत और 2381 लोग अब भी लापता, नया खतरा मंडराया.

Praggya Singh sabal28 August 20265 min read22 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ का कहर, 469 लोगों की मौत और 2381 लोग अब भी लापता, नया खतरा मंडराया.

नेपाल में आई विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं और तबाही का आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। 28 अगस्त को मिली जानकारी के अनुसार, नेपाल के विभिन्न इलाकों में इस प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। सरकार और राहत एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे बचाव कार्यों के बीच मरने वालों और लापता लोगों की संख्या ने सबको झकझोर कर रख दिया है। आम लोग इस त्रासदी से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही नई चेतावनियों ने लोगों की धड़कनों को और बढ़ा दिया है। इस आपदा में देश और विदेश के कई नागरिक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिनकी तलाश के लिए सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर मैदान में उतारा गया है।

आठ जिलों से हुई मौतों की पुष्टि और लापता लोगों का आंकड़ा

नेपाल पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, देश के आठ जिलों से अब तक कुल 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव कार्यों के दौरान अलग-अलग जगहों से शवों को बरामद करने का सिलसिला जारी है। सबसे ज्यादा तबाही चितवन और नवलपरासी ईस्ट जिलों में देखने को मिली है, जहां अकेले चितवन में 178 और नवलपरासी ईस्ट में 110 लोगों की जान गई है। चितवन में प्रशासन ने बरामद किए गए शवों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि रसुवा जिले में लापता लोगों की तलाश के लिए खोज अभियान को बहुत तेज कर दिया गया है। इसके अलावा, पूरे देश में 2,381 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए पुलिस और सेना दिन-रात एक कर रही है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल

इस भीषण त्रासदी की चपेट में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी और पर्यटक भी आए हैं। पुलिस के अनुसार, लापता कुल 2,381 लोगों में से 644 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जो नेपाल घूमने आए थे। इन विदेशी नागरिकों में 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 25 कनाडाई नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा विदेश में रहने वाले 127 नेपाली नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं जो छुट्टियों में अपने वतन घूमने आए हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में विदेशियों के लापता होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गया है और विभिन्न देशों के दूतावास लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में हैं।

एक और नई झील बनने से बाढ़ का बड़ा खतरा

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRMA ने एक नई चेतावनी जारी कर स्थिति को और डरावना बना दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, भले ही हालिया बाढ़ का असर थोड़ा कम होता दिख रहा हो, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि रसुवागढ़ी के ऊपर ल्हेन्डे धारा का पानी रुक गया है और वहां एक खतरनाक झील बन गई है। यदि यह प्राकृतिक बांध किसी भी समय टूटता है, तो निचले इलाकों में एक बार फिर से भयंकर बाढ़ आ सकती है। सरकार ने ल्हेन्डे, भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे निचले इलाकों में रहने वाले सभी लोगों से अपील की है कि वे नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखें और प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली चेतावनियों पर पूरा ध्यान दें।

युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी

स्थिति से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में पूरी ताकत झोंक दी है। प्रभावित क्षेत्रों में कुल 13,295 सुरक्षाकर्मियों और 15 हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया है। इस भारी-भरकम तैनाती में 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 नेपाली सेना और 1,845 सशस्त्र पुलिस बल के जवान दिन-रात राहत सामग्री बांटने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं। एनडीआरआरएमए के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने अब तक करीब 1,976 लोगों की जान बचा ली है। वहीं, राजधानी काठमांडू घाटी के विभिन्न अस्पतालों में इस आपदा में घायल हुए करीब 60 लोगों का इलाज चल रहा है, जिनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

कैसे आई थी यह भयंकर आपदा

अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक आपदा बीते 10 सितंबर को आई थी जब नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक बर्फ और चट्टान का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढह गया था। इस भूस्खलन से लगभग एक वर्ग किलोमीटर का पूरा इलाका इसकी चपेट में आ गया था, जिससे ऐसा लगा मानो 5.2 तीव्रता का कोई तेज भूकंप आया हो। इस घटना की वजह से भारी मात्रा में पानी अचानक भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में बह निकला, जिसके कारण निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही मच गई। सड़क और बिजली की टूटी हुई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। धुंचे-ग्रांग, बिदुर-त्रिशूली-धुंगे और बैरेनी-मुगलिन के महत्वपूर्ण हिस्सों में भारी मशीनें तैनात कर दी गई हैं, जबकि देवीघाट में रास्ते की रुकावट को पूरी तरह हटा दिया गया है।

सरकार द्वारा आपातकालीन फंड और सामग्री का वितरण

प्रभावित इलाकों में मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने तुरंत वित्तीय सहायता जारी कर दी है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट जिलों को एक करोड़ रुपये तथा धाडिंग जिले को 50 लाख रुपये की शुरुआती राहत राशि दी गई है। लोगों के बीच खाने-पीने की चीजें, साफ पानी, रहने के लिए टेंट, कंबल, सोलर लैंप, जनरेटर और पावर बैंक जैसी जरूरी आपातकालीन सामग्रियां लगातार बांटी जा रही हैं। इसके अलावा ईंधन की आपूर्ति को भी सुचारू रखा गया है और प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के लिए 18,000 लीटर डीजल और पेट्रोल भेजा गया है ताकि राहत वाहन और मशीनें बिना रुके काम कर सकें। इस संबंध में अधिक जानकारी और अपडेट्स के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

Share:

Comments

Leave a comment