Nepal Flood: नेपाल में भयानक बाढ़ के बाद स्वच्छता और महिलाओं की सेहत पर बड़ा संकट, राहत शिविरों में हालात खराब.

नेपाल में आई भीषण बाढ़ की वजह से स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो गई है और वहां के राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 1 सितंबर 2026 तक मिले आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में मरने वालों की कुल संख्या 1,003 तक पहुंच गई है। इसके अलावा करीब 4,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं जबकि सरकारी और बचाव टीमों ने लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। यह जानकारी नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA की तरफ से दी गई है। बाढ़ के बाद राहत शिविरों में रह रही महिलाओं और लड़कियों को साफ-सफाई और महावारी के दौरान इस्तेमाल होने वाली चीजों को लेकर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि शिविरों में बहुत ज्यादा भीड़भाड़ है।
राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी
संयुक्त राष्ट्र यानी UN Women की एशिया और प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक Christine Arab ने बताया कि इस समय लगभग 43,000 महिलाओं और लड़कियों को तुरंत मानवीय मदद की जरूरत है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता Stéphane Dujarric ने जानकारी दी कि कुल 65,000 लोगों को आपातकालीन पानी, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं की सख्त जरूरत है। नुवाकोट जिले के एक स्कूल में बनाए गए राहत शिविर में 400 से ज्यादा लोग रह रहे हैं लेकिन वहां सिर्फ तीन शौचालय हैं और पीने या इस्तेमाल के लिए नल का पानी बिल्कुल नहीं आ रहा है। राहत और बचाव कार्य में जुटी संस्थाएं जैसे UNFPA, IsraAID और Mercy Corps लोगों को जरूरत का सामान, हाइजीन किट और बच्चों की देखभाल का सामान बांट रही हैं लेकिन बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उनके पास पहनने के लिए अंदरूनी कपड़े और सैनिटाइज़र उत्पादों को फेंकने के लिए सही जगह बिल्कुल नहीं है।
रास्ते बंद होने से बचाव कार्य में आ रही दिक्कतें
बाढ़ और भूस्खलन की वजह से सड़कें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं और बिजली तथा पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है जिससे राहत कार्यों में बहुत रुकावट आ रही है। कई बड़े संगठन जैसे UNICEF, UNDP, WHO और OCHA मिलकर इन कमियों को दूर करने की कोशिश में लगे हुए हैं। साफ-सफाई की कमी के अलावा अधिकारियों ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उनका शोषण होने और मानव तस्करी के खतरे बढ़ने की बात भी कही है। इसके अलावा महिलाओं पर घर के कामकाज और बिना वेतन वाली जिम्मेदारियों का बोझ भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है। नेपाल के पर्यावरण मंत्री और विदेश मंत्री Shisir Khanal ने कहा है कि सरकार इस बड़ी आपदा से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद मांग रही है और दुनिया भर के देशों से जलवायु परिवर्तन के असर को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने आपदा के बाद मिलने वाली मदद को कोई दान नहीं बल्कि ग्रीनहाउस गैस छोड़ने वाले देशों की नैतिक जिम्मेदारी बताया है।