नेपाल में बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन मुश्किल, जानिए क्या कह रहे एक्सपर्ट्स.

Nura Basta7 September 20264 min read16 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन मुश्किल, जानिए क्या कह रहे एक्सपर्ट्स.

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। बाढ़ के पानी और मलबे की वजह से कई सुरंगों के भीतर लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन यह रेस्क्यू ऑपरेशन अब बहुत ज्यादा जटिल होता जा रहा है क्योंकि राहत टीमों को एक साथ कई जगहों पर मोर्चा संभालना पड़ रहा है। इन सभी अभियानों में अलग-अलग खतरे और अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स संभाल रहे हैं मोर्चा

इस पूरे बचाव अभियान का नेतृत्व दुनिया के जाने-माने 62 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ और भूविज्ञानी प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स कर रहे हैं। प्रोफेसर डिक्स वही शख्स हैं जिन्होंने भारत के उत्तराखंड में वर्ष 2023 में सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। उस सफल बचाव अभियान के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली थी। अब नेपाल के हालात को लेकर उनका कहना है कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है क्योंकि यहां एक ही समय में कई मोर्चों पर बचाव कार्य करने पड़ रहे हैं।

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सोमवार को सोशल मीडिया पर अपने पुराने अनुभव को याद करते हुए प्रोफेसर डिक्स ने बताया कि सिल्क्यारा सुरंग का सफल रेस्क्यू इस बात का बड़ा सबूत था कि अगर सब मिलकर प्रयास करें तो असंभव दिखने वाले काम को भी पूरा किया जा सकता है। हालांकि उनका मानना है कि एक बड़ी चुनौती पार कर लेने का यह मतलब बिल्कुल नहीं होता कि बाकी सभी परीक्षाएं समाप्त हो गई हैं। इसके विपरीत, ऐसी सफलताएं हमारे सामने और भी बड़ी जिम्मेदारियां लेकर आती हैं, जिन्हें पूरी ईमानदारी से निभाना पड़ता है।

पूर्वी और पश्चिमी दर्शन का दिया हवाला

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रोफेसर डिक्स ने पश्चिमी देशों के कर्तव्य और पूर्वी देशों के धर्म के बीच की समानता के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने साफ कहा कि बचाव अभियान के दौरान हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सफलता की उम्मीद भले ही कम या अनिश्चित हो, लेकिन हमें सही काम करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। सिल्क्यारा की घटना से उन्होंने यह सीखा कि किसी भी परिस्थिति को सिर्फ इसलिए असंभव नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि वह पहली नजर में बहुत कठिन या नामुमकिन दिखाई दे रही हो।

उन्होंने आगे बताया कि नेपाल के मौजूदा हालात उन्हें एक नया और बहुत बड़ा सबक सिखा रहे हैं। जब एक ही समय में दर्जनों लोगों की जिंदगी बचाव टीमों के हाथ में होती है, तब यह बहुत जरूरी हो जाता है कि हम केवल उम्मीद लगाने के बजाय उसे अनुशासित कार्रवाई में बदलें। इसके साथ ही संवेदना को व्यावहारिक मदद के रूप में पीड़ितों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी होता है ताकि किसी की जान बचाई जा सके।

प्रशासन और सुरक्षा बल लगातार जुटे

प्रोफेसर डिक्स के मुताबिक किसी भी रेस्क्यू ऑपरेशन की असली परीक्षा इस बात से नहीं होती कि अंत में कितनी जिंदगियां बचाई गईं। असली परीक्षा यह देखने से होती है कि हालात कितने भी खराब क्यों न हों, जिम्मेदारियां कितनी भी बढ़ जाएं और परिणाम चाहे जितने अनिश्चित हों, बचाव दल अपने प्रयास लगातार जारी रखता है या नहीं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सफलता का आकलन सिर्फ बचाए गए लोगों की गिनती से नहीं होना चाहिए, बल्कि उन लोगों की तलाश पूरी शिद्दत से जारी रखनी चाहिए जो अब भी जीवित हो सकते हैं।

उनके इन विचारों ने पूर्वी नेपाल में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप के दौरान राहत कार्यों का सामना करने वाले लोगों की पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। कई लोगों का ऐसा मानना है कि प्रोफेसर डिक्स के इन पॉजिटिव संदेशों ने उन्हें पिछली आपदाओं की याद तो दिलाई ही है, साथ ही इस मौजूदा संकट के समय में लोगों के दिलों में एक नई उम्मीद भी जगाई है।

मौजूदा हालात से निपटने के लिए नेपाल के भोटेकोशी और उससे प्रभावित दूसरे इलाकों में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और तमाम विशेषज्ञ बचाव दलों को पूरी तरह से तैनात किया गया है। ये सभी टीमें आधुनिक उपकरणों और स्थानीय जानकारियों की मदद से लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सुरंगों के भीतर कौन-कौन फंसा है। प्रशासन की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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