नेपाल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए भारत सरकार ने भेजी फॉरेसिंक टीम, डीएनए जांच से होगी पहचान.

नेपाल में आए विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आए भयानक फ्लैश फ्लड के बाद अब भारतीय सरकार ने अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान करने में स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए भारत ने विशेष तौर पर फॉरेसिंक विशेषज्ञों की टीम नेपाल भेजी है, जिससे लापता लोगों के परिवारों को वैज्ञानिक सत्यापन के जरिए थोड़ी राहत मिल सके।
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही और आंकड़े
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अगस्त 2026 तक भोटेकोशी बाढ़ आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो चुकी है। इसके अलावा करीब 2,419 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटी हुई हैं। इस संकट की घड़ी में भारत सरकार लगातार नेपाल के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान कर रही है ताकि राहत कार्यों में कोई रुकावट न आए।
विशेषज्ञों की टीम और राहत सामग्री की खेप
शव की पहचान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फॉरेसिंक विज्ञान विश्वविद्यालय यानी NFSU से 10 सदस्यों की एक विशेषज्ञ टीम डॉ. भार्गव पटेल के नेतृत्व में 29 अगस्त 2026 को काठमांडू के लिए रवाना हुई थी। यह पूरा अभियान 19 सदस्यों के एक बड़े जत्थे का हिस्सा है, जिसमें डीएनए सैंपल लेने और उसकी जांच करने के लिए छह फॉरेसिंक टीमें शामिल हैं। इस पूरे मिशन को भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है ताकि परिवारों को उनके अपनों के बारे में सही जानकारी मिल सके।
चौथी राहत उड़ान और नेपाल में नए खतरे
विदेश मंत्री डा. एस. जयशंकर के अनुसार, भारत ने 30 अगस्त 2026 को काठमांडू के लिए अपना चौथा राहत विमान सी-130जे हरक्यूलिस भेजा। इस विमान में 11 टन जरूरी सामान, सुरंग में खोज और बचाव कार्य के लिए खास तौर पर प्रशिक्षित तकनीकी दल और फॉरेसिंक विशेषज्ञ शामिल थे। नेपाल में तैनात भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू पहुंचकर इन फॉरेसिंक कर्मियों से मुलाकात की और नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर इन विशेष टीमों के काम करने के तरीके का जायजा लिया। दूसरी ओर, नदियों और नालों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने नुवाकोट और रसुवा जिलों में अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड को लेकर ताजा चेतावनी जारी की है।