नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए अस्थायी आवास का सर्वे शुरू, एक हफ्ते में रिपोर्ट आने की उम्मीद

Aanya10 September 20264 min read29 viewsWorld
नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए अस्थायी आवास का सर्वे शुरू, एक हफ्ते में रिपोर्ट आने की उम्मीद

नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से बेघर हुए लोगों के लिए सरकार ने अब राहत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में विस्थापितों के लिए अस्थायी आवास की जरूरत का सटीक आकलन करने हेतु एक विशेष सर्वे की शुरुआत कर दी है। इस सर्वे के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि वास्तव में कितने परिवारों को तुरंत सिर छुपाने के लिए अलग से अस्थायी आवास की आवश्यकता है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित जगहों पर बसाया जा सके।

हजारों लोग अभी भी रह रहे हैं होल्डिंग सेंटरों में

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेपाल के विभिन्न प्रभावित जिलों में हजारों लोग अभी भी आपातकालीन होल्डिंग सेंटरों में रहने को मजबूर हैं। शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग के उपमहानिदेशक और बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय द्वारा गठित पुनर्वास एवं आश्रय प्रबंधन कार्यदल के संयोजक प्रकाश आर्याल के मुताबिक, होल्डिंग सेंटरों में रह रहा हर एक व्यक्ति अलग अस्थायी आवास का जरूरतमंद हो, ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। इसी बात की सही सच्चाई का पता लगाने के लिए यह जमीनी स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है।

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यह पूरा सर्वे स्थानीय सरकारों के माध्यम से बहुत ही सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत अस्थायी आवास की सख्त जरूरत वाले लोगों और परिवारों की संख्या का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। अधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि फॉर्म के माध्यम से सभी आवश्यक और जरूरी जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद सरकार उपयुक्त और सुरक्षित स्थानों की पहचान करेगी और फिर तेजी से अस्थायी आवासों के निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय सरकारों के पूरे समन्वय के साथ आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि किसी भी जरूरतमंद परिवार को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

जमीन की पहचान का काम पहले ही हो चुका है शुरू

राहत और बचाव कार्य को आगे बढ़ाते हुए नुवाकोट के गल्छी और बिदुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अस्थायी आवास के लिए जमीन की पहचान का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है। प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विभिन्न जिलों के होल्डिंग सेंटरों में रह रहे बाढ़ प्रभावितों को उनकी अपनी पसंद के अनुसार अस्थायी आवास उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल के लिए इन होल्डिंग सेंटरों का इस्तेमाल केवल आपातकालीन आश्रय के तौर पर किया जा रहा है और वहां रह रहे प्रभावित परिवारों को बाद में अलग-अलग अस्थायी आवासों में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, अगर बात करें स्थायी पुनर्वास की तो वह प्रक्रिया सरकार द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन करने और एक ठोस पुनर्निर्माण योजना तैयार करने के बाद ही शुरू की जाएगी। शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग की विशेष टीमें पिछले मंगलवार से ही प्रभावित जिलों में लगातार भेजी जा रही हैं, जो मौके पर पहुंचकर हर तरह के नुकसान का बारीकी से आकलन कर रही हैं। सर्वे के दौरान प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों से जुड़ी कई बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा रही हैं, जिनका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।

सर्वे में जुटाई जा रही हैं ये जरूरी जानकारियां

सर्वे के दौरान अधिकारियों द्वारा परिवारों से कई जरूरी सवाल पूछे जा रहे हैं और उनका डेटा तैयार किया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जा रहा है कि घर पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है या फिर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके अलावा परिवार के कितने सदस्यों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई है या कितने लोग अभी भी लापता हैं, इसकी भी पूरी सूची बनाई जा रही है। सर्वे फॉर्म में यह भी दर्ज किया जा रहा है कि संबंधित परिवार सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अस्थायी आवास में रहना चाहता है या फिर वह किराए के मकान में रहना पसंद करेगा।

इन तमाम बातों के अलावा यह भी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है कि क्या परिवार के पास अपनी खुद की जमीन है या नहीं, वे भविष्य में कहां स्थानांतरित होना चाहते हैं और उन्हें पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य बुनियादी जरूरी सेवाओं की क्या-क्या आवश्यकताएं हैं। शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग को पूरी उम्मीद है कि यह महत्वपूर्ण सर्वे आगामी एक सप्ताह के भीतर सफलतापर्वूक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार उन प्रभावित परिवारों का भी सर्वे करने की पूरी योजना बना रही है, जो फिलहाल किसी वजह से होल्डिंग सेंटरों में नहीं रह रहे हैं। जब यह व्यापक आकलन पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा, तब अस्थायी आवास निर्माण की प्रक्रिया को और अधिक तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, रसुवा जैसे कुछ इलाकों में आई भयंकर बाढ़ ने कई परिवारों के घरों के साथ-साथ उनकी पूरी जमीन तक को बहा दिया है, जिसके चलते सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है क्योंकि कुछ परिवारों के पास वापस लौटने के लिए जरा सी भी सुरक्षित जगह नहीं बची है।

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