नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ का तांडव, 123 शव बरामद और सैकड़ों लोग लापता, 139 भारतीय भी शामिल.

पड़ोसी देश नेपाल में प्रकृति का भयंकर रूप देखने को मिला है जहां हाल ही में आई भीषण बाढ़ और तबाही ने भारी कोहराम मचा दिया है। मौसम की इस मार से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और हर तरफ बर्बादी के निशान दिखाई दे रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 123 शवों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
अलग-अलग जिलों से बरामद हुए शव
नेपाल के रसुवा और उसके आसपास के इलाकों में बाढ़ ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को चीन की सीमा से लगे इलाकों से लेकर भारत की सीमा के पास तक के क्षेत्रों से शव मिले हैं। सरकारी जानकारी के मुताबिक, सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रसुवा से 1 शव बरामद हुआ है, जबकि भारतीय सीमा से सटे चितवन जिले की नारायणी नदी से सबसे अधिक 64 शव निकाले गए हैं। इसके अलावा गोरखा जिले से 19 शव, धादिंग से 18, नुवाकोट से 11, तनहु से 9 और नवलपरासी जिले से 1 शव बरामद किया गया है, जो खुद भारत की सीमा से सटा हुआ एक प्रमुख इलाका है।
संपर्कविहीन लोगों और सुरक्षाकर्मियों की सूची
जिला प्रशासन कार्यालय से मिली रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 245 स्थानीय नागरिक पूरी तरह संपर्कविहीन हो चुके हैं और उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा ने सुरक्षा बलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नेपाल पुलिस के 26 जवान, नेपाली सेना के 22 जवान और सशस्त्र प्रहरी बल के 13 जवान भी लापता बताए जा रहे हैं, जो बचाव कार्य के दौरान या अपने ड्यूटी क्षेत्रों में फंसे हुए थे।
लापता पर्यटकों में बड़ी संख्या में भारतीय शामिल
बाढ़ प्रभावित इलाकों में देश-विदेश के सैलानी भी भारी संख्या में फंसे हुए हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में कुल 384 पर्यटक संपर्क विहीन बताए जा रहे हैं। इनमें चिंताजनक बात यह है कि लापता होने वाले पर्यटकों में 139 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय मूल के 37 एनआरआई पर्यटक भी लापता लोगों की सूची में बताए जा रहे हैं, जिससे उनके परिवारों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।
घायलों का इलाज और राहत अभियान
गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस आपदा में घायल हुए लोगों में से अब तक 75 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है। इन सभी घायलों का इलाज काठमांडू और उसके आसपास के बेहतरीन अस्पतालों में डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है। संकट की इस घड़ी में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर अब तक 216 लोगों को सुरक्षित जीवित बचाने में सफलता हासिल की है। इनमें से 123 लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया है जबकि 93 लोगों को जमीन के रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
इस विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के परिवहन और संपर्क ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज पूरी तरह पानी में बह गए हैं, जिससे कई गांवों और शहरों का संपर्क आपस में कट गया है। इसके अलावा लगभग 40 किलोमीटर लंबा हाइवे भी बाढ़ की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा निकाय और राहत-बचत दल लगातार लापता लोगों की खोजबीन में जुटे हुए हैं और स्थिति अभी भी काफी गंभीर बनी हुई है।