नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, 1300 लोगों की मौत और 2.56 अरब डॉलर का नुकसान.

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और इस आपदा से देश की आर्थिक स्थिति और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। नेपाल और चीन की सीमा के पास लगभग 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर टूटने की आशंका के बाद यह भयंकर बाढ़ आई थी। इस आपदा की वजह से नेपाल में कुल $2.56 अरब डॉलर यानी करीब 387.5 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
राहत और बचाव कार्यों के लिए भारी फंड की जरूरत
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA के प्रमुख धर्मा राज उप्रेती ने जानकारी दी है कि अगले चार महीनों में शुरुआती रिकवरी और राहत कार्यों के लिए तुरंत $52.6 मिलियन डॉलर यानी लगभग 7.95 अरब नेपाली रुपये की जरूरत है। इन पैसों का इस्तेमाल पीने के पानी और बिजली की बहाली, टूटी हुई सड़कों के पुनर्निर्माण और प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी तंबू या शेल्टर बनाने में किया जाएगा ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
मौतों का आंकड़ा बढ़ा और बचाव अभियान जारी
5 सितंबर 2026 तक मिले आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 1,300 हो गई है, जबकि लगभग 4,898 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार जुटी हुई हैं। इसमें भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय बचाव दल भी नेपाल की मदद कर रहे हैं। ये टीमें हाइड्रोइलेक्ट्रिक सुरंगों में फंसे लोगों को ढूंढने का काम कर रही हैं। इसी बीच 5 सितंबर 2026 को बचाव कर्मियों ने बाढ़ आने के 10 दिन बाद मलबे से एक चीनी नागरिक और एक महिला को जिंदा बाहर निकालने में बड़ी सफलता हासिल की है।
सरकार का बयान और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने इस भयानक आपदा के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है और बताया कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान में 1.8 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 3 सितंबर 2026 को भोटे कोशी बाढ़ को लेकर एक कूटनीतिक ब्रीफिंग की और पुष्टि की कि सरकार नुकसान का पूरा आकलन करने के लिए पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट शुरू करेगी। इस बारे में अधिक जानकारी विदेश मंत्रालय नेपाल की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई है और सरकार के नेतृत्व में चलाए जा रहे राहत कार्यों में हरसंभव मदद का वादा किया है। इसके साथ ही नेपाली सेना भी लगातार खोज और बचाव अभियानों में डटी हुई है, जैसा कि अमेरिकी दूतावास नेपाल की रिपोर्ट में बताया गया है। प्रशासन द्वारा भोजन और जरूरी सहायता सामग्री बांटी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और राहत शिविरों में रह रहे लोगों को अभी भी दवाइयों और नकदी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी जानकारी यूएस एंबेसी अलर्ट में साझा की गई है।