नेपाल में भारी बाढ़ और भूस्खलन से तबाही, सुरंगों में फंसे हाइड्रोपावर वर्कर, भारत और चीन से मांगी मदद.

नेपाल में मौसम की मार और भारी तबाही के बीच प्रशासन ने अब दूसरे देशों से मदद मांग ली है। देश के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके धाडिंग में बाढ़ का पानी भले ही थोड़ा कम हुआ है, लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने सुरंगों के अंदर फंसे हाइड्रोपावर के कामगारों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत और चीन से विशेष मदद की गुहार लगाई है। इस भयानक आपदा के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और देश के कई हिस्सों में राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने जारी किया हाई अलर्ट
नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA ने रविवार को सुबह 7:20 बजे एक सख्त चेतावनी जारी की थी। चीनी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, ऊपरी इलाकों में पानी का बहाव काफी ज्यादा बढ़ गया है, जिससे रासुवा, नुवाकोट, चितवन और धाडिंग जैसे जिले सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। त्रिशूल नदी का पानी बहुत तेज रफ्तार से बह रहा है और कृष्णभीर इलाके में लगातार कटाव हो रहा है। इस वजह से मुख्य मार्ग यानी पृथ्वी हाईवे पूरी तरह से बंद हो गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप पड़ गया है।
विदेश मंत्री ने की विदेशी मदद की पुष्टि
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पिछले दिनों 29 अगस्त को इस बात की आधिकारिक पुष्टि की थी कि देश में खोज और बचाव अभियान की कमियों को दूर करने के लिए विदेशी तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। अलग-अलग 11 हाइड्रोपावर साइट्स पर काम करने वाले कम से कम 573 वर्कर या तो लापता हैं या फिर मलबे और सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोग अपर त्रिशूल 1 में 322, अपर त्रिशूल 3B में 122, रसुवागढ़ी में 44 और अपर त्रिशूल 3A में 43 की संख्या में फंसे हुए हैं। देश के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने जानकारी दी है कि सरकार ने भारत और चीन से 2,000 एयरटाइट बॉडी बैग मंगवा लिए हैं और चीन से 30 बेली ब्रिज देने का अनुरोध भी किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय टीमें पहुंचीं मौके पर
इस बड़ी आपदा से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेस्क्यू टीमों का पहुंचना शुरू हो गया है। भारत की नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी NDRF की 11 सदस्यों वाली तकनीकी टीम पिछले दिनों 29 अगस्त को ही नेपाल पहुंच चुकी है। यह टीम चिलिमे और लांगटांग के हाइड्रोपावर सुरंगों में नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके साथ ही चीन की टनल रेस्क्यू टीम भी शनिवार को ही घटनास्थल पर पहुंच गई थी और चार अन्य विशेषज्ञों के भी जल्द ही इस अभियान में शामिल होने की उम्मीद है। दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी इस आपदा प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर बचाव कार्यों में अपना सहयोग दे रहे हैं ताकि जल्द से जल्द फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जा सके।