नेपाल में भयानक बाढ़ का कहर, यूरोपीय संघ ने मदद के लिए बढ़ाए हाथ और दिए 2 मिलियन यूरो.

नेपाल में हाल ही में आए खतरनाक बाढ़ और लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचाई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस मुश्किल समय में प्रभावित लोगों की मदद के लिए European Union ने बड़ा कदम उठाया है और 2 million euros यानी करीब दो मिलियन यूरो की मानवीय सहायता देने का ऐलान किया है। यह आपदा बुधवार, 26 August 2026 को तिब्बत की सीमा के पास एक ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद आए भूस्खलन की वजह से शुरू हुई थी। इस भयानक आपदा में अब तक कम से कम 543 lives यानी 543 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें नेपाल में 538 और तिब्बत में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 1,500 people से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें कई विदेशी नागरिक और टूरिस्ट भी शामिल हैं। बाढ़ ने कई गांवों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
राहत कार्यों और पैसों के इस्तेमाल की पूरी जानकारी
यूरोपीय संघ की कमिश्नर फॉर प्रिपेरडनेस एंड क्राइसिस मैनेजमेंट Hadja Lahbib ने 28 August 2026 को इस फंडिंग की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस मदद की रकम को पहले तय किए गए एक मिलियन यूरो से बढ़ाकर दो मिलियन यूरो कर दिया गया है। इस पैसे का मुख्य मकसद प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाना है, जिसमें खाने-पीने की चीजें, स्वास्थ्य सेवाएं, साफ पीने का पानी और सैनिटेशन की सुविधाएं शामिल हैं। यूरोपियन कमीशन की चीफ Ursula von der Leyen ने कहा कि इन आपातकालीन संसाधनों का उद्देश्य सबसे ज्यादा प्रभावित परिवारों और समुदायों को जीवन बचाने वाली सहायता प्रदान करना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत कामों को आसान बनाने के लिए ईयू ने अपनी Copernicus satellite service को एक्टिव कर दिया है ताकि प्रभावित इलाकों का सही नक्शा मिल सके। इसके साथ ही एशिया के लिए अपना रैपिड रिस्पांस कोऑर्डिनेटर भी तैनात किया जा रहा है। जमीन पर राहत और बचाव के काम नेपाली सरकार की देखरेख में चल रहे हैं, जिसमें विभिन्न यूएन एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय साथियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही है मदद और क्या हैं जमीनी हालात
संयुक्त राष्ट्र यानी UN ने अपने सेंट्रल इमरजेंसी रिस्पांस फंड यानी CERF के जरिए अलग से $2.5 million की मदद जुटाई है। इसके अलावा भारत की तरफ से भी आपातकालीन आपूर्ति भेजी गई है, जबकि स्विट्जरलैंड ने $1 million और अमेरिका ने $500,000 की आर्थिक मदद दी है। पब्लिक हेल्थ से जुड़े अधिकारियों ने साफ-सुथरी जगहों और सैनिटेशन सिस्टम के पूरी तरह बर्बाद होने की वजह से बीमारियों के फैलने की चिंता जताई है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ की वजह से 18 schools पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं और 20 schools को आंशिक नुकसान पहुंचा है, जिससे लगभग 10,000 children की पढ़ाई बीच में ही रुक गई है। नेपाली सेना की अगुवाई में चलाए जा रहे सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि रास्ते मलबे से पटे पड़े हैं और शुरुआती ढलान की वजह से पानी का एक बड़ा तालाब जैसी स्थिति बन गई है, जिससे रास्ता और मुश्किल हो गया है।