नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही पर पीएम मोदी ने जताया दुख, भारत ने भेजी मदद

नेपाल में हाल ही में आए भयानक बाढ़ और आपदा के बाद वहां के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शुक्रिया अदा किया है। बुधवार, 26 अगस्त 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री ने फोन पर हुई बातचीत के दौरान भारत द्वारा दिखाए गए समर्थन और संवेदनाओं के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की तरफ से मिला यह साथ दोनों देशों के बीच सदियों पुराने और मजबूत रिश्तों को साफ तौर पर दिखाता है। इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के रसुवा जिले और उसके आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
आपदा में भारी नुकसान और लापता लोगों की तलाश
अधिकारियों के अनुसार नेपाल में आई इस तबाही में मरने वालों की संख्या 95 से 157 के बीच बताई जा रही है। इसके अलावा इस आपदा में सैकड़ों लोग लापता भी हो गए हैं, जिनकी तलाश के लिए राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। लापता लोगों में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनमें 105 से 133 भारतीय नागरिक, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक शामिल हैं। इस भीषण संकट के बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानल ने पुष्टि की है कि देश के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसमें कम से कम एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। नेपाल सरकार अब इस आपदा से उबरने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राहत कार्यों को आगे बढ़ा रही है।
भारत की तरफ से तुरंत भेजी गई राहत सामग्री
इस संकट की घड़ी में भारत सरकार ने नेपाल को हरसंभव मदद देने का पूरा भरोसा दिलाया है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान के जरिए 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री यानी HADR तथा जरूरी दवाइयां नेपाल भेज दी हैं। आगे के राहत और बचाव कार्यों के लिए बड़े परिवहन विमान जैसे सी-17 और सी-130 के साथ-साथ हेलीकॉप्टरों को भी पूरी तरह तैयार रखा जा रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी UNI India की रिपोर्ट में दी गई है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर जमीन पर मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF के जवानों को भी तैनात करने पर विचार किया जा रहा है।
सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट और अंतरराष्ट्रीय सहायता
नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत के नेपाल से सटे राज्यों जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। इसके साथ ही नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित नागरिकों की मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए हैं। इस आपदा को लेकर NewsOnAIR की रिपोर्ट में भी दोनों देशों के बीच मजबूत आपसी सहयोग का जिक्र किया गया है। शुरुआती दौर में यह आशंका जताई जा रही थी कि तिब्बत में आए किसी भूकंप के कारण यह आपदा आई है, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS की हालिया जांच में बाढ़ के समय किसी भी तरह की भूकंपीय गतिविधि के सबूत नहीं मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए गए हैं, जिसमें विश्व बैंक यानी World Bank ने पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए 25 अरब रुपये यानी लगभग 188 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन वित्तीय सहायता देने की पेशकश की है। इसके अलावा यूनिसेफ यानी UNICEF ने भी प्रभावित बच्चों और परिवारों को हरसंभव सहायता देने का ऐलान किया है।