नेपाल में भारी बाढ़ और तबाही से भारत-चीन सीमा पर आपूर्ति ठप, अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका.

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं ने देश की उत्तरी सीमा पर होने वाली जरूरी चीजों की आपूर्ति को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। इस आपदा की वजह से व्यापार और सीमा शुल्क राजस्व पर बहुत बुरा असर पड़ा है, जिससे सरकार की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। नेपाल के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इस बात की पूरी जानकारी दी है कि कैसे मौसम की इस मार ने आम जनजीवन के साथ-साथ देश की आर्थिक गतिविधियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
रसुवागढ़ी सीमा पर आपूर्ति पूरी तरह ठप
वित्त सचिव डॉ. घनश्याम उपाध्याय ने प्रतिनिधि सभा की वित्त समिति की बैठक में जानकारी देते हुए बताया कि रसुवा में आई भयंकर बाढ़ और कृष्णभीर में सड़क धंसने की घटना के कारण उत्तरी सीमा से होने वाला आयात और व्यापार पूरी तरह से रुक गया था। रसुवागढ़ी सीमा नाके पर चीन से आने वाला सामान बिल्कुल बंद हो गया, जिसका सीधा असर नेपाल के सीमा शुल्क राजस्व यानी कस्टम कलेक्शन पर साफ तौर पर दिखाई दिया। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए और आयात को किसी तरह चालू रखने के वास्ते कोराला सीमा नाके पर अतिरिक्त कर्मचारियों को भी तैनात किया था, लेकिन कृष्णभीर में सड़क धंसने के बाद हालात और ज्यादा खराब हो गए और आवाजाही का यह रास्ता भी बंद हो गया।
सड़कें और पुल पूरी तरह तबाह
आपदा के कारण बुनियादी ढांचे को जो नुकसान पहुंचा है, उसके आंकड़े बहुत डराने वाले हैं। वित्त सचिव के अनुसार बाढ़ के पानी ने बेत्रावती–रसुवागढ़ी सड़क के 55 किलोमीटर हिस्से को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। इसके अलावा गल्छी–देवीघाट सड़क के चार किलोमीटर हिस्से की पक्की सड़क को भी काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं 10 किलोमीटर लंबी देवीघाट–त्रिशूली–बेत्रावती सड़क भी इस आपदा से नहीं बच पाई और उसे भी आंशिक क्षति उठानी पड़ी है। देश के चार जिलों में मोटर गाड़ियों के चलने योग्य कुल 33 पुल पूरी तरह से बह गए हैं या नष्ट हो गए हैं, जबकि चार अन्य पुलों को आंशिक नुकसान हुआ है। इन टूटे हुए मोटर योग्य पुलों की कुल लंबाई करीब 3,000 मीटर है। इसके साथ ही आम लोगों के आने-जाने के लिए बने 68 झूला पुल भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाना बहुत मुश्किल हो गया है।
बैंकिंग और व्यापार पर भारी असर
इस प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा बल्कि वित्तीय और व्यावसायिक जगत को भी इससे बहुत बड़ा झटका लगा है। देश के वित्तीय क्षेत्र में कुल 12 बैंकों की 17 शाखाएं या तो पूरी तरह से तबाह हो गई हैं या फिर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं। आपदा की वजह से लगभग 4,800 व्यावसायिक प्रतिष्ठान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी भारी तबाही देखने को मिली है, जहां 18 स्कूलों के 56 भवन पूरी तरह मलबੇ में तब्दील हो गए हैं और इनमें कुल 308 कक्षाएं चलती थीं, जो अब नष्ट हो चुकी हैं। इसके अलावा कुल 7,570 निजी भवन या तो पूरी तरह या फिर आंशिक रूप से टूट गए हैं। सरकारी संपत्तियों की बात करें तो 48 सरकारी भवनों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से 35 भवन पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं।
विस्तृत नुकसान के आंकड़े
सरकार द्वारा जुटाए गए विस्तृत आकलन के मुताबिक बाढ़ और भूस्खलन की वजह से व्यापार, उद्योग और पर्यटन क्षेत्र को भारी छति उठानी पड़ी है। इस तबाही में कुल 1,259 होटल और रेस्तरां, 1,212 थोक एवं खुदरा कारोबार की दुकानें, तथा बिजली, गैस और पानी से जुड़ी 345 परियोजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। इसके साथ ही 263 विनिर्माण उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़ी 227 गतिविधियां भी बुरी तरह से ठप हो गई हैं। कृषि क्षेत्र को भी इससे भारी नुकसान हुआ है क्योंकि बाढ़ के कारण 1,806 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बिजली उत्पादन के मोर्चे पर भी बड़ा आघात लगा है जहां कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं और 25 सिंचाई परियोजनाएं इस आपदा से प्रभावित हुई हैं। इन सभी मुश्किल हालातों के बीच वित्त सचिव ने यह भी जानकारी दी है कि संकट की इस घड़ी में प्रधानमंत्री राहत कोष में नेपाल के भीतर से और विदेशों से भी लगातार आर्थिक मदद और सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे राहत कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। इस पूरी खबर के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।