नेपाल में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, 120 से ज्यादा भारतीय और चीनी नागरिक सुरक्षित मिले

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में ग्लेशियर टूटने और भीषण बाढ़ की वजह से भारी तबाही मच गई है। इस आपदा में लापता हुए लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। गनीमत रही कि बचाव दल ने अब तक 100 भारतीय पर्यटकों और 25 चीनी कामगारों को सुरक्षित ढूंढ निकाला है, जिससे उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
बुधवार को शुरू हुई थी तबाही
यह भयंकर आपदा बुधवार, 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित पहाड़ी क्षेत्रों में आई थी। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह कोई भूकंप है, लेकिन बाद में यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने पुष्टि की कि यह एक बहुत बड़ा ग्लेशियर कोलैप्स यानी हिमस्खलन और मलबा प्रवाह था, जिसके कारण दोनों ही क्षेत्रों में भारी तबाही हुई।
लाखों लोग और भारी नुकसान
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, गुरुवार, 27 अगस्त 2026 तक अकेले नेपाल में 165 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 826 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं पड़ोसी तिब्बत क्षेत्र में कम से कम 3 लोगों की मौत हुई और 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं। दोनों इलाकों को मिलाकर कुल 1,300 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें 30 से अधिक देशों के लगभग 800 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
सरकार का कड़ा कदम और मदद
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों को तीन महीने के लिए "आपदा संकट क्षेत्र" घोषित कर दिया है। नेपाली सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि देश ने भारत और चीन दोनों से मदद की गुहार लगाई है। भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 47 टन मानवीय सहायता नेपाल भेज दी है। इसके अलावा नेपाली सेना, पुलिस और निजी हेलीकॉप्टर ऑपरेटर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। गुरुवार सुबह ही नेपाली सेना ने 21 भारतीय पर्यटकों समेत 123 लोगों को एयरलिफ्ट किया है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बुनियादी ढांचे को नुकसान
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मामले में पूरी ताकत से खोजबीन करने का आदेश दिया है, जबकि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुरुआत में लगभग 100 चीनी नागरिकों के लापता होने की बात कही थी। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस घटना पर दुख जताया है और नेपाल सरकार को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। इस आपदा से नेपाल की बोटे कोशी नदी और तिब्बत के ग्यािरोंग काउंटी के पास सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और संचार नेटवर्क पूरी तरह तबाह हो गए हैं। भारत के बिहार राज्य में भी प्रशासन ने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए छह जिलों के लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।