Nepal Glacial Threat: नेपाल में ग्लेशियर टूटने से बड़ा खतरा, विशेषज्ञ बोले कभी भी फट सकती है नई झील.

Aanya29 August 20263 min read18 viewsWorld
Nepal Glacial Threat: नेपाल में ग्लेशियर टूटने से बड़ा खतरा, विशेषज्ञ बोले कभी भी फट सकती है नई झील.

नेपाल में हाल ही में हुए भयानक हादसे के बाद अब एक और बड़े खतरे की घंटी बज गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोराडो बोल्डर के माउंटेन जॉग्राफर Alton Byers ने 29 अगस्त 2026 को चेतावनी दी है कि नेपाल की ऊपरी ल्हेन्दे नदी प्रणाली में नई बनी हिमनद झीलें बहुत बड़ा और तुरंत आने वाला खतरा बन चुकी हैं। अल जज़ीरा को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने साफ बताया कि ये झीलें किसी मजबूत बेस पर नहीं टिकी हैं, बल्कि हाल ही में हुए ग्लेशियर ढहने से बचे हुए ढीले मलबे और पत्थरों के सहारे रुकी हुई हैं। बिना किसी खास चेतावनी के कभी भी टूट सकती हैं।

आपदा में 579 लोगों की मौत और राहत कार्य

नेपाली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, 29 अगस्त 2026 तक इस आपदा में कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,924 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा की शुरुआत 26 अगस्त 2026 को हुई थी। शुरुआती ढलाव के कारण बर्फ और चट्टानों का एक बहुत बड़ा मलबा ल्हेन्दे नदी में जा गिरा, जिसकी वजह से त्रिशूल नदी का जलस्तर महज 30 मिनट के भीतर ही 9 मीटर तक बढ़ गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने साफ किया कि इस दौरान जो भूकंप जैसे झटके महसूस हुए थे, वे किसी भूकंप की वजह से नहीं बल्कि इस भयानक भूस्खलन के कारण आए थे।

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चीन की चेतावनी और बचाव कार्य

चीनी अधिकारियों ने 29 अगस्त 2026 को नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस खतरे के प्रति आगाह किया था। उन्होंने बताया कि झील के पानी का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है जो इस बात का साफ संकेत है कि यह झील कभी भी फट सकती है। हालांकि चीन की तरफ से किए गए बाढ़ के सिमुलेशन यह बताते हैं कि अगर यह टूटती भी है, तो इसका पानी शायद नदियों के किनारों के भीतर ही सीमित रह सकता है। चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने वैज्ञानिक तरीकों से खोज और बचाव अभियान चलाने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री Li Qiang ने भी 27 अगस्त 2026 को खुद घटनास्थल का दौरा किया था।

सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मदद

इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्कटिक एंड अल्पाइन रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञ Alton Byers का कहना है कि पानी का धीरे-धीरे अपने आप निकलना सबसे अच्छा होता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो हाथ के औजारों का इस्तेमाल करके पानी को कृत्रिम तरीके से नीचे लाया जा सकता है। इस तरीके का इस्तेमाल पहले भी कई अन्य जगहों पर सफलतापूर्वक किया जा चुका है ताकि खतरे को टाला जा सके। नेपाली अधिकारियों ने 28 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि ऊपर की तरफ बनी दोनों बैरियर झीलों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ के डर से बीच में रोके गए बचाव कार्यों को अब फिर से शुरू कर दिया गया है। पनबिजली संयंत्रों, सड़कों और पुलों को पहुंचे भारी नुकसान को ठीक करने के लिए भारत, संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस फेडरेशन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय सहायता देने का ऐलान किया है।

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