नेपाल में भीषण बाढ़ का कहर, हिमालयी इलाके में अचानक आए सैलाब से 644 पर्यटक लापता.

हिमालयी देश नेपाल से एक बड़ी और डराने वाली खबर सामने आ रही है जहाँ मौसम के अचानक बदले मिजाज और प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में अचानक आए भीषण फ्लैश फ्लड यानी झमाझम पानी के सैलाब और बाढ़ की वजह से कुल 644 पर्यटक और यात्री लापता हो गए हैं। इस बड़े हादसे में केवल विदेशी नागरिक ही नहीं बल्कि स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और प्रशासन लगातार लोगों की तलाश में जुटा हुआ है।
कहाँ और कैसे हुई यह भयंकर प्राकृतिक आपदा
अधिकारियों के अनुसार यह भयानक आपदा 26 अगस्त 2026 को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 8:30 बजे शुरू हुई, जब मुख्य रूप से भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक तेज बाढ़ आ गई। काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट के जलवायु विशेषज्ञों ने बताया कि यह आपदा माउंट लांगटांग लिरंग पर ग्लेशियर के टूटने और रॉक-आइस एवलांच यानी बर्फ और चट्टानों के गिरने की वजह से आई थी। इस भयानक घटना के चलते त्रिशूली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट के भीतर ही 27 फीट तक ऊपर उठ गया, जिससे आसपास के इलाकों में पानी भर गया और सब कुछ तबाह हो गया। वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भी यह साफ किया कि शुरुआत में जिस 4.4 तीव्रता के भूकंप की बात सामने आ रही थी, असल में वह इस ग्लेशियर के टूटने से पैदा हुए भूकंपीय झटके थे।
लापता लोगों की सूची में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल
नेपाल टूरिज्म बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार लापता होने वाले कुल 644 लोगों में 127 नेपाली नागरिक और 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। ये शुरुआती आंकड़े ट्रेकिंग और ट्रैवल कंपनियों द्वारा जुटाए गए रिकॉर्ड से मिले हैं, जिनकी स्थानीय अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों और टूर गाइड के डेटा से पुष्टि की जा रही है। इन विदेशी नागरिकों में दुनिया भर के कई देशों के लोग शामिल हैं, जिनमें अकेले भारत से 178 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका से 65, यूक्रेन से 53, मलेशिया से 51, ऑस्ट्रेलिया से 35, यूनाइटेड किंगडम से 33 और कनाडा से 25 नागरिक शामिल हैं। इसके साथ ही जर्मनी और रूस से 8-8, लातविया और दक्षिण अफ्रीका से 6-6, जापान से 5, फ्रांस से 4 और बेल्जियम, बुग्गारिया, स्पेन तथा बेलारूस से 3-3 पर्यटक लापता हैं। इटली, आयरलैंड, कजाकिस्तान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और सिंगापुर से 2-2 लोग जबकि हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, सर्बिया, स्वीडन और स्विट्जरलैंड से 1-1 नागरिक सूची में शामिल हैं। इसके अलावा 9 दक्षिण कोरियाई हाइड्रोपावर वर्कर भी लापता हैं जबकि 10 अन्य लोग फंसे हुए बताए गए हैं।
प्रशासन और सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्य
नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार देश भर में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और अकेले नेपाल में 826 लोगों के लापता होने की खबर है जबकि 165 शव बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि नेपाल पुलिस ने मरने वालों का आंकड़ा इससे ज्यादा बताते हुए कहा है कि अब तक 270 शव मिल चुके हैं। पुलिस प्रवक्ता अभि नारायण काफ्ले ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे खोज और बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, मरने वालों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। सीमा पार चीन के तिब्बत में भी ग्यािरोंग काउंटी में 558 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं और वहां 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल और तिब्बत दोनों को मिलाकर लापता लोगों का कुल आंकड़ा 1,000 के पार चला गया है। इस आपदा से निपटने के लिए नेपाल सेना ने 14 हेलीकॉप्टरों के साथ डिजास्टर रिस्पांस टीमों को रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा जिलों में तैनात किया है। चीन के प्रधानमंत्री ली किआंग ने भी सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है, जबकि अमेरिकी सरकार ने 500,000 अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन सहायता देने की घोषणा की है। इस संकट की घड़ी में भारत, मलेशिया, जापान और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड Crescent सोसाइटीज जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं। संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ टूरिस्ट पुलिस लगातार बचाव कार्यों पर नजर बनाए हुए है। पर्यटकों और उनके परिजनों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिसमें सहायता के लिए आपातकालीन नंबर 1234, पर्यटन हॉटलाइन 1144 या टूरिस्ट पुलिस के नंबर 9851289445 पर संपर्क किया जा सकता है।