नेपाल में प्राकृतिक आपदा का कहर, बाढ़ से मनास्लु ट्रेकिंग रूट ठप और दो जलविद्युत परियोजनाएं बही.

नेपाल के उत्तरी हिस्से में मौसम की मार ने आम जनजीवन के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। मनास्लु संरक्षण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली नदियां उफान पर हैं, जिससे वहां की व्यवस्था चरमरा गई है। ताजा घटनाक्रम में बूढ़ीगंडकी और थेरांग नदी में अचानक बाढ़ आने से प्रसिद्ध ट्रेकिंग मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया है। इस आपदा के कारण इलाके के दो महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ वहां घूमने गए पर्यटकों का आना-जाना भी पूरी तरह से बंद हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अगले आदेश तक इस रूट पर यात्रा करने पर रोक लगा दी है।
प्रशासन का कड़ा कदम और यात्रा पर रोक
जिला प्रशासन कार्यालय ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत प्रभाव से कदम उठाया है। सहायक प्रमुख जिला अधिकारी नेत्रप्रसाद शर्मा ने मीडिया को जानकारी दी कि उत्तरी गोरखा के चुमनुब्री नामरुंग इलाके में यह भारी तबाही हुई है। उन्होंने बताया कि बूढ़ीगंडकी और थेरांग खोला में आई भयंकर बाढ़ ने दो पुलों को अपने साथ बहा लिया है। इसके अलावा दो जलविद्युत परियोजनाएं भी इसकी चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। राहत की बात यह है कि इस प्राकृतिक आपदा में अभी तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या किसी के हताहत होने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासनिक अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।
फंसे पर्यटक और बुनियादी सेवाओं पर असर
स्थानीय निवासी लाक्पा डुन्डुप ने हालात के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि पुलों के बह जाने से सामान्य जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। ट्रेकिंग रूट पर जाने वाले सैकड़ों पर्यटक रास्ते में ही फंस गए हैं, क्योंकि बूढ़ीगंडकी नदी पार करने का अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। इसके अलावा दो लघु जलविद्युत परियोजनाएं बह जाने के कारण पूरे क्षेत्र की बिजली गुल हो गई है। बिजली न होने से संचार सेवाएं और बिजली पर चलने वाले अन्य जरूरी कामकाज भी ठप पड़ गए हैं, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यटन सीजन पर मंडराया संकट
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल शरद ऋतु के दौरान मनास्लु हिमाल पर चढ़ाई करने के लिए भारी संख्या में पर्वतारोहियों ने पंजीयन कराया है। कुल 29 टीमों के 348 पर्वतारोहियों ने अकेले मनास्लु के लिए अनुमति ली है। वहीं, अगर पूरे हिमालयी क्षेत्र की बात करें तो इस सीजन में 32 टीमों के 367 पर्वतारोही विभिन्न चोटियों पर चढ़ाई की अनुमति लेकर पहुंचे हैं। अचानक आए इस प्राकृतिक संकट और रास्ते के पुल बह जाने से इस साल शुरू हो रहे पर्यटन सत्र पर बुरा असर पड़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है। लार्के पास जाने वाले सैलानी अब अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं और हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट देख सकते हैं।