Nepal Flood Update: नेपाल सरकार का बड़ा फैसला, 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक का ऐलान, इतने लोगों की हुई मौत.

नेपाल सरकार ने हाल ही में आए विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के पीड़ितों को याद करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। देश की सरकार ने आधिकारिक तौर पर 7 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। यह फैसला नेपाल के बहुत ही महत्वपूर्ण इलाकों जैसे कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारों पर 26 अगस्त 2026 को आई भयंकर बाढ़ के बाद लिया गया है। इस आपदा ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया था और देश को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। इस संबंध में मंत्रिमंडल की बैठक 3 सितंबर 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें यह अहम फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। सरकार के इस कदम से साफ है कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
राष्ट्रीय शोक के दौरान क्या नियम रहेंगे और किस तरह से दी जाएगी श्रद्धांजलि
निर्धारित शोक दिवस के दिन नेपाल भर के सभी सरकारी कार्यालयों में देश का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया जाएगा। इसके अलावा विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों और कूटनीतिक मिशनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि इस दिन किसी भी तरह का सार्वजनिक अवकाश घोषित नहीं किया जाएगा ताकि कामकाज प्रभावित न हो, लेकिन शोक की औपचारिकता पूरी गंभीरता के साथ निभाई जाएगी। इस तारीख का चयन हिंदू अंतिम संस्कार की परंपराओं के अनुसार किया गया है, जो आपदा के बाद का 13वां दिन बैठता है। इस बारे में जानकारी आधिकारिक स्रोत Ministry of Foreign Affairs Nepal के जरिए साझा की गई है, जिसमें देश और विदेश के सभी नागरिकों से इस दिन मौन रखकर मृतकों को याद करने की अपील की गई है।
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र और जान-माल का भारी नुकसान
इस भयानक बाढ़ ने नेपाल के कई जिलों को बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था, जिनमें मुख्य रूप से रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन शामिल हैं। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव की विधिवत घोषणा की। वहीं दूसरी ओर, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 3 सितंबर को एक कूटनीतिक ब्रीफिंग के दौरान इस आपदा को हिमालयी सुनामी की संज्ञा दी थी। उस ब्रीफिंग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,204 शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि 11,993 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। हालांकि, अभी भी लगभग 4,200 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 34 देशों के 590 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिससे इस आपदा का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताजनक बन गया है। इससे पहले, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA की रिपोर्ट के मुताबिक 1 सितंबर 2026 तक 987 मौतें और 3,916 लोग लापता दर्ज किए गए थे।
राहत और बचाव कार्यों के साथ सरकार की तरफ से सहायता योजनाएं
जमीनी स्तर पर हालात से निपटने के लिए सुरक्षा अभियान अभी भी पूरी तेजी के साथ जारी हैं। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के लगभग 20,819 जवान लगातार खोजबीन, बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद का सिलसिला जारी है, जिसके तहत एशियाई विकास बैंक यानी ADB ने आपातकालीन राहत कार्यों के लिए 5 मिलियन डॉलर के अनुदान की घोषणा की है। इसके अलावा, नेपाली सरकार ने प्रभावित कारोबारियों और संस्थाओं को राहत देने के लिए एक एकीकृत व्यवसाय पुनर्वास योजना को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत टैक्स और कस्टम में विशेष छूट दी जाएगी। सरकार ने यह भी ऐलान किया है कि मारे गए लोगों के परिवारों को 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और घायल हुए सभी सुरक्षाकर्मियों तथा नागरिकों का इलाज पूरी तरह से मुफ्त किया जाएगा। तमाम कोशिशों के बावजूद मौसम विभाग ने 5 सितंबर तक लगातार बारिश की चेतावनी जारी रखी है, जिससे नए सिरे से भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। भारी बारिश और आपदा के कारण पृथ्वी राजमार्ग कृष्ण भीर के पास बंद है और रसुवा के कई हिस्से अभी भी पूरी तरह से कटे हुए हैं, जिसकी वजह से राहत सामग्री और लॉजिस्टिक्स पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।