नेपाल में आपदा प्रबंधन के लिए विपक्षी दलों की मांग, सरकार से संसदीय विशेष समिति बनाने को कहा

नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के राहत और बचाव कार्यों को और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए विपक्षी दलों ने सरकार के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि देश में आपदा प्रबंधन, राहत, बचाव, खोज और पुनर्स्थापना के कामों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए संसद की एक विशेष समिति का गठन किया जाए। इस संबंध में विपक्षी दलों ने सरकार का ध्यान खींचने का पूरा मन बना लिया है और संसद के भीतर भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का फैसला किया गया है।
विपक्षी दलों की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
मिली जानकारी के अनुसार, 10 सितंबर को काठमांडू में विपक्षी दलों की एक अहम बैठक आयोजित की गई थी। यह बैठक गुरुवार को सिंहदरबार स्थित कांग्रेस संसदीय दल के कार्यालय में हुई। एमाले संसदीय दल की उपनेता पद्मा अर्याल ने इस बैठक के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बैठक में यह तय किया गया कि सरकारी स्तर पर चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की सही से निगरानी और निरीक्षण किया जाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही सरकार को समय-समय पर आवश्यक सुझाव देने और संसदीय स्तर से जरूरी सहयोग व तालमेल बैठाने के लिए एक विशेष समिति का होना बहुत आवश्यक है, जिसका गठन अब तक सरकार की तरफ से नहीं किया गया है।
आपदा कार्यों में कमियों पर हुई चर्चा
नेपाल की इस महत्वपूर्ण बैठक में अब तक खोज और बचाव के कामों में जुटी तमाम सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की गई और उनको धन्यवाद भी दिया गया। हालांकि, बैठक में यह बात भी खुलकर सामने आई कि आपदा आने से पहले की तैयारी और शुरुआती दौर में जिस तरह की सलाह-मशविरे और तालमेल की जरूरत होती थी, उसमें कुछ कमियां जरूर रह गईं। इसी वजह से शुरुआती चरण में राहत पहुंचाने के दौरान कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। नेता पद्मा अर्याल ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम लोगों का धैर्य पूरी तरह से टूटे उससे पहले सरकार को अस्थायी पुनर्स्थापना के कामों को बहुत ही तेज गति से आगे बढ़ाना चाहिए ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर साथ काम करने की प्रतिबद्धता
इस राष्ट्रीय आपदा की मुश्किल घड़ी में सभी विपक्षी दलों ने आपसी मतभेद और दलगत राजनीतिक स्वार्थों को पूरी तरह से अलग रखने का फैसला किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे अपने सभी पुराने एजेंडों को छोड़कर पूरी ईमानदारी के साथ सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं ताकि देश के आपदा पीड़ितों की मदद की जा सके। सरकार पर लगातार दबाव बनाने के लिए विपक्षी दल संसद के भीतर मजबूती के साथ अपनी आवाज उठाएंगे और सरकार का ध्यान इस तरफ आकर्षित करते रहेंगे ताकि राहत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए।