नेपाल के प्रधानमंत्री का बड़ा ऐलान, जलप्रलय में लापता लोगों की तलाश जारी और हर पीड़ित का होगा पुनर्वास

नेपाल में आई भयानक जलप्रलय के बाद देश के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राहत और बचाव कार्य को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि बाढ़ और आपदा की इस स्थिति में लापता हुए हर एक व्यक्ति को ढूंढने और बचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। सरकार तब तक अपना खोज और बचाव अभियान पूरी ताकत से चलाती रहेगी जब तक उम्मीद की आखिरी किरण बाकी है। प्रधानमंत्री ने यह भी वादा किया है कि आपदा से प्रभावित होने वाले प्रत्येक नागरिक को सरकार की तरफ से फिर से बसाया यानी पुनर्वासित किया जाएगा।
आपदा से जुड़े ताजा आंकड़े और राहत कार्य
द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने शनिवार की रात को फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर इस बड़ी आपदा से हुई तबाही के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस जलप्रलय ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में नदी के पास रहने वाले इलाकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। सरकार की सबसे पहली कोशिश यही है कि संकट में फंसे हर एक नागरिक की जान बचाई जाए। खराब मौसम और बेहद मुश्किल पहाड़ी रास्तों के बावजूद अब तक कुल 7,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया है। इन सुरक्षित निकाले गए लोगों में अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं की साइटों पर फंसे हुए 279 कर्मचारी भी शामिल हैं।
इस बड़े राहत अभियान में नेपाल की सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 18,708 सुरक्षाकर्मी पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। राहत कार्यों में मदद के लिए सेना और निजी कंपनियों के कुल 16 हेलीकॉप्टरों को भी लगाया गया है। इन सभी टीमों ने मिलकर अब तक 236 सफल बचाव अभियान पूरे कर लिए हैं। नेपाल के स्थानीय बलों के साथ-साथ भारत और चीन के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी जमीन पर उतरकर लगातार मदद कर रहे हैं। मुश्किल और जोखिम भरे इलाकों में लगातार काम कर रहे जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने तैनात सुरक्षा बलों के दैनिक नाश्ते के भत्ते और प्रोत्साहन राशि को तुरंत बढ़ाने की घोषणा की है।
अंतरराष्ट्रीय मदद और वित्तीय सहायता का विवरण
प्रधानमंत्री शाह ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री राहत कोष में कमर्शियल खातों के जरिए अब तक कुल 5.04 बिलियन एनपीआर और 1.8 मिलियन यूएसडी जमा हो चुके हैं। इस पूरे पैसे का हिसाब-किताब सरकार के आधिकारिक 'रेस्क्यू रिक्वेस्ट पोर्टल' पर कोई भी आम आदमी आसानी से देख सकता है। उन्होंने देश के नागरिकों और दान देने वाले लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के फर्जीवाड़े या धोखे से बचने के लिए वे केवल सरकार के आधिकारिक क्यूआर कोड के जरिए ही अपनी मदद भेजें।
विदेशी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से नेपाल को काफी बड़ी मात्रा में मदद मिल रही है। वर्ल्ड बैंक की तरफ से 167 मिलियन यूएसडी का रियायती लोन मिला है। इसके अलावा एडीबी यानी एशियाई विकास बैंक ने 5 मिलियन यूएसडी की ग्रांट और 1.5 लाख यूएसडी की तकनीकी मदद दी है। अमेरिका की तरफ से 500,000 यूएसडी, ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 1 मिलियन एयूडी और स्विट्जरलैंड की तरफ से संयुक्त राष्ट्र के जरिए 1 मिलियन स्विस फ्रैंक की सहायता राशि पहुंचाई गई है।
पड़ोसी देश भारत ने राहत कार्यों में हाथ बढ़ाते हुए 57.5 टन आपातकालीन मेडिकल और मानवीय सहायता सामग्री नेपाल भेजी है। इसके साथ ही भारत ने नेपाल को 2,000 एयरटाइट बॉडी बैग भी पहुंचाए हैं। चीन भी इसी तरह की मानवीय मदद और बॉडी बैग भेज रहा है। नेपाल ने बाढ़ में तबाह हो चुके नदी के पुलों को ठीक करने के लिए बीजिंग से औपचारिक तौर पर 30 बेली ब्रिज की मांग की है। सरकार की तरफ से यह भी पुष्टि कर दी गई है कि कुल 8 जिलों से अब तक 675 शव बरामद किए जा चुके हैं। सरकार का पूरा तंत्र तब तक पूरी ताकत से काम करता रहेगा जब तक राहत और लंबे समय के पुनर्निर्माण के सभी लक्ष्य पूरी तरह से पूरे नहीं हो जाते।