नेपाल ने पहली बार मांगी जलवायु फंड से आपात सहायता, भारी बाढ़ के बाद उठाया यह बड़ा कदम

हिमालयी देश नेपाल ने अपने इतिहास में पहली बार जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बने विशेष फंड से मदद मांगी है। देश में हाल ही में आई भीषण और विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने यह आपातकालीन कदम उठाया है ताकि तुरंत राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा सकें। इस गंभीर आपदा से देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मची है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बाढ़ और हिमताल फटने से हुआ भारी नुकसान
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह आपदा गत 26 अगस्त को एक हिमताल फटने के बाद शुरू हुई थी। इसके कारण ल्हेन्दे खोला से होते हुए भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक भयंकर बाढ़ आ गई थी। इस अचानक आई जल प्रलय ने बड़े पैमाने पर जनहानि की है और साथ ही देश के बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर और पूरी अर्थव्यवस्था को भी बहुत ज्यादा छति पहुंचाई है। इसी भारी तबाही के बाद नेपाल सरकार ने तत्काल राहत और पुनर्स्थापना के लिए इस अंतरराष्ट्रीय फंड से मदद की गुहार लगाई है।
मंत्रियों ने संयुक्त रूप से भेजा पत्र
इस गंभीर मामले पर कार्रवाई करते हुए वित्तमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले और कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने मिलकर एक संयुक्त पत्र लिखा है। यह पत्र फंड के सह-अध्यक्षों को भेजा गया है, जिसमें बाढ़ से हुए भारी नुकसान का जिक्र करते हुए तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की गई है। हालांकि, अभी तक इस पत्र का कोई भी औपचारिक जवाब संबंधित फंड की तरफ से प्राप्त नहीं हुआ है.
फंड की रैपिड रिस्पॉन्स सुविधा का लिया सहारा
कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के तहत जलवायु परिवर्तन प्रबंधन महाशाखा की उपसचिव दीपा ओली ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि नेपाल ने फंड की 'रैपिड रिस्पॉन्स' सुविधा के तहत यह आपातकालीन सहायता मांगी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेपाल ने अभी तक कोई भी निश्चित राशि मांग पत्र में तय नहीं की है। नेपाल को मिलने वाली राशि पूरी तरह से सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले नुकसान के प्रमाण और विवरण तथा फंड की बोर्ड बैठक में होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।
कार्बन उत्सर्जन में योगदान नगण्य फिर भी भुगतना पड़ रहा खामियाजा
अधिकारी दीपा ओली ने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में नेपाल की भूमिका या योगदान नगण्य के बराबर है, इसके बावजूद देश को जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण ही भोटेकोशी नदी में अचानक हिमबाढ़ आई जिससे भारी तबाही हुई। देश को इस समय तुरंत वित्तीय मदद की सख्त जरूरत है और इसी मुख्य उद्देश्य के साथ यह पत्राचार किया गया है।
इतिहास में पहली बार किसी देश ने मांगी ऐसी आपात मदद
विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, 'लॉस एंड डैमेज' फंड से इस तरह आपातकालीन सहायता की मांग किया जाना इस फंड के इतिहास में पूरी तरह से नया मामला है। इस प्रकार की आपातकालीन सहायता मांगने वाला नेपाल दुनिया का पहला देश बन गया है। नेपाल सरकार और अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि इस विशेष फंड से देश को लगभग 3000 करोड़ नेपाली रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त हो सकती है, जिससे बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।