भारत के चीनी निर्यात प्रतिबंध से नेपाल में बढ़ी कीमतें, संसदीय समिति ने जताई गहरी चिंता

Nura Basta9 September 20263 min read35 viewsIndia
भारत के चीनी निर्यात प्रतिबंध से नेपाल में बढ़ी कीमतें, संसदीय समिति ने जताई गहरी चिंता

भारत द्वारा चीनी के निर्यात पर रोक लगाने के बाद पड़ोसी देश नेपाल में खाने की इस मीठी चीज़ के दाम आसमान छूने लगे हैं, जिससे आम जनता की जेब पर भारी असर पड़ रहा है। नेपाल की संसद में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है और सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की जा रही है। बाजार में अचानक आई इस तेजी के बाद से आम उपभोक्ताओं की परेशानी काफी बढ़ गई है।

संसदीय समिति की बैठक में उठा महंगाई का मुद्दा

नेपाल की उद्योग एवं वाणिज्य तथा श्रम एवं उपभोक्ता हित संसदीय समिति के अध्यक्ष रहबर अंसारी ने भारत के निर्यात बैन के बाद नेपाल के बाजारों में पैदा हुए हालात पर गंभीर चिंता जताई है। समिति की बैठक के दौरान उन्होंने साफ कहा कि कुछ ही महीनों के भीतर चीनी की कीमतों में इतनी तेज़ बढ़ोतरी कैसे हो गई, यह एक बड़ा सवाल है। इससे पहले बाजार में पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया गया था और यह भरोसा दिलाया गया था कि भारत के बैन के बाद भी दाम नहीं बढ़ेंगे, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इसके बिल्कुल उलट निकली है।

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आम आदमी की पहुंच से बाहर हुई चीनी

बैठक में यह अहम सवाल उठाया गया कि देखते ही देखते चीनी की कीमत बढ़कर 130 रुपये प्रति किलोग्राम तक कैसे पहुंच गई। तय उम्मीद के मुताबिक पहले चीनी का दाम 85 रुपये प्रति किलोग्राम रहने की उम्मीद जताई गई थी, जिस पर वैट जोड़ने के बाद यह कीमत करीब 96 रुपये प्रति किलोग्राम आनी चाहिए थी। लेकिन मौजूदा समय में खुदरा बाजार में चीनी खुलेआम 105 से 130 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बेची जा रही है, जिससे लोग परेशान हैं।

समय पर आयात न होना और कालाबाजारी बनी बड़ी वजह

अध्यक्ष रहबर अंसारी ने इस बात पर जोर दिया कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद कीमतें क्यों बढ़ रही हैं, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मंहगाई और कमी के पीछे एक मुख्य कारण यह भी है कि समय रहते अन्य देशों से चीनी का आयात नहीं किया गया। इसके अलावा बाजार में चल रही मनमानी और जमाखोरी भी कीमतों को बढ़ाने में पूरा खेल खेल रही है।

कानून सख्त करने और निगरानी बढ़ाने की मांग

संसदीय समिति के प्रमुख ने संबंधित मंत्रालय से अपील की है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए। उन्होंने मांग की है कि बाजार में चल रही कार्टेलिंग और कालाबाजारी को रोकने के लिए संसद में जल्द से जल्द नए और कड़े कानून व विधेयक पेश किए जाएं। उनका कहना है कि बाजार की निगरानी व्यवस्था को कागजी कार्रवाई की बजाय व्यावहारिक और तर्कसंगत बनाया जाना बेहद जरूरी है।

इसके साथ ही महंगे सॉफ्टवेयर की खरीद में पूरी पारदर्शिता बरतने और बुनियादी ढांचे को नुकसान तथा ईंधन की समस्याओं के कारण बढ़ने वाली परिवहन लागत जैसी व्यावहारिक दिक्कतों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। इस मामले की पूरी जानकारी हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से सामने आई है।

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