नेपाल-तिब्बत सीमा पर खतरनाक बाढ़, लापता अमेरिकी नागरिकों रमेश और नीलम शर्मा की तलाश जारी.

Sushma Kumari27 August 20262 min read65 viewsWorld
नेपाल-तिब्बत सीमा पर खतरनाक बाढ़, लापता अमेरिकी नागरिकों रमेश और नीलम शर्मा की तलाश जारी.

नेपाल और तिब्बत सीमा पर हाल ही में आए खतरनाक फ्लैश फ्लड के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और इस आपदा में बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए हैं। डॉ. राधिका शर्मा ने अपने माता-पिता रमेश शर्मा और नीलम शर्मा की तलाश के लिए एक गंभीर अपील जारी की है, जो इस भयानक हादसे के बाद लापता हुए 47 अमेरिकी नागरिकों में शामिल हैं। यह तबाही बुधवार, 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई थी, जहां पानी और कीचड़ के तेज बहाव ने भारी तबाही मचाई है और कई इलाकों को पूरी तरह सेबर्बाद कर दिया है।

आपदा का कारण और आधिकारिक आंकड़े

विशेषज्ञों के अनुसार यह आपदा किसी सामान्य बाढ़ जैसी नहीं थी, बल्कि कीचड़ और पानी का बहाव इतना तेज था कि वह किसी बहते हुए कंक्रीट की तरह आगे बढ़ रहा था। 27 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक नेपाली अधिकारियों ने कुल 157 शवों को बरामद कर लिया है, जबकि नेपाल के पर्यटन बोर्ड के अनुसार करीब 403 लोग अभी भी लापता हैं जिनमें 341 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। तिब्बती सीमा के पास ग्यारोंग इलाके में चीनी सरकारी मीडिया ने कम से कम 3 मौतें और 265 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने जानकारी दी कि सुबह 8:37 बजे एक 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था और उसके ठीक तीन मिनट बाद ही बाढ़ आने की खबरें सामने आने लगीं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने शुरुआत में इसे भूकंप माना था, लेकिन बाद में यह साफ हुआ कि यह तबाही किसी ग्लेशियर के टूटने और भारी मलबे के बहाव के कारण हुई थी।

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राहत और बचाव कार्य

इस बड़ी आपदा से निपटने के लिए पड़ोसी देशों की तरफ से लगातार मदद पहुंचाई जा रही है और राहत कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हरसंभव बचाव कार्य करने का आदेश दिया है, जिसके तहत ग्यारोंग में 800 आपातकालीन कर्मचारी, 150 वाहन, खोजी कुत्ते और स्पीडबोट तैनात किए गए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने खासकर रसुवा जिले के स्याप्रु बेसी और तिमुरी जैसे खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित जगह पर जाने का आदेश दिया है। इस आपदा की वजह से फ्रेंडशिप ब्रिज और पासांग ल्हामू हाईवे को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि भोटे कोसी, त्रिशूली और नारायणी नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है.

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता देने की पेशकश की है और आपदा राहत टीमों को तैयार रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अंतरराष्ट्रीय मदद जुटाने की पुष्टि की है, हालांकि लगातार हो रही भारी मानसून बारिश के कारण कई प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच पा रहे हैं जिससे बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं। डॉ. शर्मा ने अस्पतालों, बचाव दलों, सरकारी विभागों और मीडिया से अपील की है कि अगर उनके माता-पिता के बारे में कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत साझा करें ताकि उनकी स्थिति का पता चल सके.

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