नेपाल और तिब्बत में भयंकर बाढ़ का कहर, मरने वालों की संख्या बढ़कर 157 हुई और कई लोग लापता.

नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसके बाद मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 157 हो गई है। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि 26 अगस्त 2026 को की है। इस दर्दनाक आपदा की चपेट में आने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अकेले नेपाल में कम से कम 95 लोगों की जान चली गई है, जबकि चीनी सरकारी प्रसारकों ने तिब्बत के ग्यािरोंग काउंटी में 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है। इस भयंकर आपदा के कारण न सिर्फ जानें गईं बल्कि बड़े पैमाने पर संपत्ति और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
लापता लोगों की तलाश और विदेशी नागरिकों की स्थिति
तिब्बत के ग्यािरोंग काउंटी में आए एक बड़े भूस्खलन की वजह से करीब 265 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, नेपाल के अधिकारियों ने राज्य में कुल 434 लोगों के लापता होने की सूचना दी है, जिनमें 341 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता होने वाले विदेशी नागरिकों की सूची में 133 भारतीय, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, एक हाइड्रोपावर प्लांट में काम करने वाले 8 दक्षिण कोरियाई नागरिक भी लापता लोगों की सूची में हैं, जबकि 10 अन्य कर्मचारी इस समय फंसे हुए हैं। ग्यािरोंग में कैलाश यात्रा पर गए 77 लोगों का एक जत्था भी इस आपदा की चपेट में आ गया था, जिससे चिंता और अधिक बढ़ गई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के विश्लेषण के अनुसार, यह आपदा किसी भूकंप के कारण नहीं बल्कि संभवतः ल्हेन्डे खोला नदी में ग्लेशियर के टूटने से आए हिमस्खलन और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण आई थी।
प्रशासन की चेतावनी और बुनियादी ढांचे को नुकसान
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने खतरे को भांपते हुए भोटे कोशी, त्रिशुली और नारायणी नदियों के किनारे रहने वाले सभी स्थानीय नागरिकों से तुरंत सुरक्षित स्थानों या ऊंचे इलाकों में जाने की अपील की है। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से देश के बिजली तंत्र को करारा झटका लगा है और करीब 430 मेगावाट बिजली की सप्लाई बाधित हो गई है। इसके अलावा नेपाल के रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट, गोरखा और चितवन जिलों में सड़कें, पुल और कई गांव पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले ने मीडिया को बताया कि लापता लोगों में 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है और राहत कार्यों के लिए हेलिकॉप्टरों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है ताकि प्रभावित इलाकों में फौरन मदद पहुंचाई जा सके।
अंतर्राष्ट्रीय मदद और आगे का खतरा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को हरसंभव और पूरी ताकत से खोज अभियान चलाने का निर्देश दिया है। उन्होंने भविष्य में संभावित二次 आपदाओं (secondary disasters) से निपटने के लिए चेतावनी प्रणालियों को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया है। इस संकट की घड़ी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद के हाथ बढ़ने लगे हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल सरकार को हरसंभव मानवीय सहायता देने का प्रस्ताव दिया है और नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर राहत कार्यों का समन्वय किया जा रहा है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास भी फंसे हुए भारतीय नागरिकों की हरसंभव मदद करने में जुटा हुआ है। इसके अलावा यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस आपदा पर गहरी चिंता जताई है और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए समर्थन का वादा किया है। नेपाल-चीन सीमा के पास नदियों के मार्ग में रुकावट आने के कारण प्रशासन ने भविष्य में दोबारा बाढ़ आने की चेतावनी जारी की है और निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है।