इजरायली चुनावों से पहले नेतन्याहू का बड़ा बयान, कतर के साथ संबंधों के दावों को बताया बड़ा धोखा

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कतर के साथ अपनी सरकार के रिश्तों को लेकर लग रहे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह सब आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक फायदा उठाने के लिए फैलाया जा रहा एक बड़ा धोखा है। चुनाव से ठीक पहले दिए गए इस बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आम जनता के बीच भी इस बात की चर्चा हो रही है कि आखिर चुनाव से पहले इन पुरानी बातों को क्यों हवा दी जा रही है।
कतर के साथ फंडिंग और सुरक्षा एजेंसियों का रुख
एक इंटरव्यू के दौरान Benjamin Netanyahu ने बताया कि उन्होंने कतर से गाजा को मिलने वाली आर्थिक मदद का बचाव किया था। उनका कहना था कि यह सारा पैसा पूरी तरह से मानवीय कामों के लिए भेजा गया था। इन पैसों के ट्रांसफर की सिफारिश इजरायल की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों Mossad और Shin Bet ने खुद की थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि गाजा में आने वाले कुल पैसों का सिर्फ 2% हिस्सा ही इन फंड्स का था। यह इंटरव्यू 5 सितंबर 2026 को रिकॉर्ड किया गया था और इसे जनता के सामने 6 सितंबर 2026 को साझा किया गया। इजरायल में आगामी आम चुनाव 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले हैं, जिससे ठीक पहले यह बयान सामने आया है।
पुराने हमलों और अमेरिका के दबाव का असर
यह पूरा विवाद ऐसे समय में गर्माया है जब पिछले साल कतर की राजधानी दोहा में हुए एक इजरायली हमले की बरसी आने वाली है। यह हमला 9 सितंबर 2025 को हमास के साथ चल रही सीजफायर बातचीत के दौरान हुआ था। इस सैन्य कार्रवाई में पाँच हमास सदस्य और कतर का एक सुरक्षा अधिकारी मारे गए थे। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने इसे कतर की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया था। इसके बाद अमेरिका के negotiators Jared Kushner और Steve Witkoff ने कहा था कि इस हमले ने आपसी भरोसे को पूरी तरह से तोड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के दबाव के बाद प्रधानमंत्री ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman bin Jassim Al Thani से औपचारिक रूप से माफी मांगी थी। कतर ने हमेशा हमास को फंड देने की बात से इनकार किया है और अमेरिका को अपनी पारदर्शिता के बारे में जानकारी दी है।