UAE Warning Case: इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने Haaretz अखबार पर ठोका मानहानि का मुकदमा, मांगे 25 लाख शेकेल.

इस्राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने एक बड़े विवाद के बाद समाचार पत्र Haaretz, पत्रकार Shlomi Eldar और सह-लेखक Ruth Yuval के खिलाफ मानहानि का मुकदमा शुरू करने की पूरी कार्रवाई कर दी है। यह पूरा मामला 7 अक्टूबर 2023 को हुए संघर्ष से ठीक पहले यूएई की तरफ से दी गई एक चेतावनी की रिपोर्ट से जुड़ा हुआ है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है।
क्या है पूरा मामला और क्यों भड़के प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 9 सितंबर 2026 को इस मानहानि के मुकदमे का ऐलान किया। उनका कहना है कि यह प्रकाशन पूरी तरह से एक झूठा इल्जाम और मनगढ़ंत कहानी है, जिसे आगामी 27 अक्टूबर के चुनाव को प्रभावित करने के लिए बहुत ही सोच-समझकर समय पर छापा गया है। प्रधानमंत्री ने अखबार से साफ मांग की है कि वे इस लेख को तुरंत हटाएं, जनता के सामने माफी मांगें और 10 लाख शेकेल का मुआवजा दें। अगर इन मांगों को नहीं माना जाता है, तो प्रधानमंत्री 25 लाख शेकेल से ज्यादा के हर्जाने के लिए औपचारिक रूप से अदालत में केस दायर करेंगे।
यूएई के राष्ट्रपति और फोन कॉल को लेकर दावा
यह सारा विवाद Eldar और Yuval की एक किताब "Hostages: 843 Days of Abandonment" से शुरू हुआ है। इस किताब और रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अक्टूबर 2023 के आखिर में, यानी 7 अक्टूबर के हमले से करीब दस दिन पहले, यूएई के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed ने Benjamin Netanyahu के साथ 45 मिनट तक एक असाधारण फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने हमास के नेता Yahya Sinwar की योजनाओं और बड़े हमले की चेतावनी दी थी।
कार्यालय की जांच और आधिकारिक बयान
इस सनसनीखेज दावे के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने तुरंत अपने आधिकारिक कॉल रिकॉर्ड और ऑफिस आने-जाने वालों की फाइलों की पूरी जांच की। इस जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि 1 सितंबर 2023 से 7 अक्टूबर 2023 के बीच ऐसी कोई भी फोन कॉल दोनों नेताओं के बीच नहीं हुई थी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी देशों के नेताओं के साथ होने वाली सभी कूटनेतिक बातचीत उनके दफ्तर के एन्क्रिप्टेड उपकरणों के जरिए होती है और उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। इसके अलावा उनके दफ्तर ने मिस्र की तरफ से भी ऐसी कोई चेतावनी मिलने की बात से साफ इनकार कर दिया है।
यूएई और मीडिया का पक्ष
दूसरी तरफ, UAE Foreign Ministry ने इस विशिष्ट बातचीत पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया और कहा कि वे मीडिया की अटकलों पर बात नहीं करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह जरूर दोहराया कि उनका देश इस्राइल के साथ सीधे संपर्क के रास्ते बनाए रखता है। वहीं दूसरी तरफ, एक अज्ञात वरिष्ठ मध्य पूर्वी खुफिया अधिकारी ने यह दावा किया कि ऐसी चेतावनी वास्तव में दी गई थी, हालांकि यह बातचीत किसे और कैसे दी गई थी, इस पर अभी भी असमंजस बना हुआ है। अखबार Haaretz ने भी अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा है कि वे अपनी रिपोर्ट की सच्चाई के साथ मजबूती से खड़े हैं।