बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर खत्म करेंगे ईरान का खतरा
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान को खत्म करने का यह ऐतिहासिक मौका है और वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर काम करेंगे।

यरूशलेम: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि उनके पास ईरान के अस्तित्वगत खतरे को खत्म करने का एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मौका है। 27 अक्टूबर 2026 को हुए चुनावों के बाद लिकुड चुनाव मुख्यालय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ईरान पहले से कहीं ज्यादा कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं ज्यादा मजबूत।
नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि यह मिशन अभी जारी है और वे इसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की साझेदारी में आगे बढ़ाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव के बाद राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है और एग्जिट पोल किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं दिखा रहे हैं। नेतन्याहू के गुट और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच मुकाबला बराबरी का नजर आ रहा है।
क्षेत्रीय तनाव फरवरी 2026 से बढ़ा हुआ है, जब इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। इन हमलों में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरें आई थीं। हालांकि, नेतन्याहू आगे सैन्य कार्रवाई चाहते हैं, लेकिन इजरायली सैन्य नेतृत्व और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर विरोध जताया है। ट्रंप 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले तनाव को और बढ़ाने से बचना चाहते हैं।
इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के राज ज़िमिट के मुताबिक, मौजूदा राजनीतिक अनिश्चितता से इजरायल की ईरान नीति में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है। वहीं MEMRI के नाविद टूबियन का कहना है कि इस रणनीति पर 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले का गहरा असर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने ईरान पर दबाव बनाया है कि वह परमाणु स्थलों तक पूरी पहुंच दे। 9 सितंबर 2026 को पारित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव के जरिए ईरान से सुरक्षा उपायों से जुड़े सवालों के जवाब मांगे गए हैं।
दूसरी तरफ, 27 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-प्रसार पर चर्चा हुई, जहां ईरान के प्रतिनिधि ने अपने बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की। ईरान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 की समय सीमा 18 अक्टूबर 2025 को ही खत्म हो चुकी है। इसी बीच, तनाव कम करने के लिए तेहरान में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई, जिसे ईरान ने उत्पादक बताया है।