हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका-ईरान तनाव से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ीं, वैश्विक बाजार में मची हलचल

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण 1 सितंबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत की भारी तेजी दर्ज की गई। दुनिया भर में होने वाले कुल तेल शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी महत्वपूर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है, लेकिन सुरक्षा कारणों से अब यहां जहाजों की आवाजाही घटकर रोजाना केवल पांच जहाज रह गई है। इस पूरी स्थिति का असर सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
सैन्य संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
दोनों देशों के बीच हालिया सैन्य गतिविधियां 30 अगस्त 2026 को उस समय और तेज हो गईं जब अमेरिकी बलों ने लाराक द्वीप पर स्थित ईरानी मिसाइल लॉन्चरों पर हमले किए। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में वहां खनन अभियानों की योजना बनाए जाने की बात कही गई थी। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। इसके अगले दिन यानी 31 अगस्त 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने जलक्षेत्र के ऊपर एक ईरानी ड्रोन को सफलताપૂર્વক मार गिराए जाने की पुष्टि की। इससे पहले 29 अगस्त 2026 को हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर भी हमला हुआ था, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता में काफी इजाफा हुआ है।
राहत वार्ताओं पर रोक और कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लेविट ने 27 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सभी प्रकार की बातचीत फिलहाल स्थगित कर दी गई है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि ईरान पर हर हफ्ते नए और कड़े सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कॉर्प के विशेषज्ञ नीश चोपड़ा ने बताया कि इस संघर्ष की वजह से कच्चे तेल के दाम सीधे बढ़ रहे हैं, जिससे महंगाई और भविष्य में ब्याज दरों को लेकर चिंताएं गहरी होती जा रही हैं।
बाजार विशेषज्ञों की चिंताएं
लिपो ऑयल एसोसिएट्स के अध्यक्ष एंड्रू लिपो ने पहले ही 14 अगस्त 2026 को चेतावनी दी थी कि बातचीत रुकने और टैंकरों पर हमलों के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पर इसी तरह पाबंदी जारी रही, तो बाजार के लिए बहुत मुश्किल वक्त आ सकता है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व प्रमुख केविन वॉर्श के उन बयानों ने भी ऊर्जा बाजारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिनमें उन्होंने लगातार बनी हुई महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं का जिक्र किया था।