Oil Prices Update: कच्चे तेल के दामों में भारी उछाल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और सप्लाई की चिंता से बढ़ी कीमत.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है और दाम पिछले कई महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। 19 मई 2026 के बाद से तेल की कीमतें इस स्तर पर बंद हुई हैं, जिसके पीछे मुख्य कारण सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताएं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता है। बाजार में आई इस तेजी से आम आदमी की जेब पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है, खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक बदलाव है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान Brent crude futures में $3.07 यानी 2.9% की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद यह $108.75 प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी US West Texas Intermediate (WTI) futures में $4.44 यानी 4.38% की बढ़त देखने को मिली और यह $105.83 प्रति बैरल के भाव पर पहुंच गया। क्षेत्रीय तनाव के बढ़ने के कारण निवेशकों ने अमेरिकी क्रूड को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में चुना, जिसके चलते WTI की कीमतों में ब्रेंट क्रूड की तुलना में ज्यादा तेजी आई। इस पूरी रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी के लिए आप WAM की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सप्लाई चेन पर असर
वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है क्योंकि Strait of Hormuz को वाणिज्यिक जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद हुए 199 दिन पूरे हो चुके हैं। इस रास्ते से होने वाला रोजाना जहाजों का आवागमन घटकर केवल आठ रह गया है, जबकि संकट से पहले यहां हर रोज औसतन 85 जहाज निकलते थे। इस संकट को और गंभीर बनाने में कई भू-राजनीतिक कारणों का हाथ है, जिसमें सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का बंद होना भी शामिल है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4% हिस्सा खतरे में पड़ गया है। इसके अलावा, यमन में ईरान समर्थित हूती गुटों ने 14 सितंबर को सऊदी अरब के सैन्य एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले तेज कर दिए हैं।
राजनयिक कोशिशें और सैन्य तनाव
क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण कूटनीतिक समाधान निकालने में लगातार रुकावटें आ रही हैं। इसका उदाहरण ओमान का वह हालिया फैसला है जिसमें उसने खाड़ी देशों और ईरान के बीच 14 सितंबर को होने वाली बैठक को टाल दिया। इस पूरे मामले को और पेचीदा बनाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसेना की नाकाबंदी कर रखी है, जिसकी वजह से सीधी सैन्य झड़पें भी देखने को मिली हैं। अमेरिकी सेना ने 5 सितंबर को ईरान के तीन कच्चे तेल के जहाजों पर हमला किया था। इसके अलावा, 15 सितंबर को एक टैंकर पर हुई घटना को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जहां ईरान का कहना है कि जहाज नौसेना की बारूदी सुरंग की चपेट में आया था, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि उस पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था।