हॉर्मूज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान की जंग हुई तेज, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम एक डॉलर से ज्यादा बढ़े.

Sushma Kumari31 August 20263 min read29 viewsWorld
हॉर्मूज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान की जंग हुई तेज, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम एक डॉलर से ज्यादा बढ़े.

दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है क्योंकि हॉर्मूज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब और भी ज्यादा खतरनाक रूप ले चुका है। 31 अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल की तरफ से ईरान पर की जा रही सैन्य कार्रवाई अब अपने छठे महीने में प्रवेश कर चुकी है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी। इस ताजा तनाव की वजह से आम आदमी से लेकर बाजार के बड़े जानकारों तक सभी लोग चिंतित हैं क्योंकि इसका सीधा असर फ्यूल और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ने की पूरी आशंका बनी हुई है।

अमेरिकी सेना की कार्रवाई और ईरान का पलटवार

बीते रविवार यानी 30 अगस्त 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि अमेरिकी सैनिकों ने लराक द्वीप पर एक बड़ा हमला किया है। इस हमले में ईरान के दो रॉकेट लॉन्चरों को पूरी तरह निशाना बनाया गया। CENTCOM के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि यह कार्रवाई पहले से ही एहतियात के तौर पर की गई थी क्योंकि वहां मौजूद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के लड़ाके हॉर्मूज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों यानी सी माइंस से लैस रॉकेट लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर रहे थे। इस स्थिति से वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा था। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी सूचना दी थी कि शनिवार को जलडमरूमध्य में प्रवेश करते समय एक टैंकर पोत किसी प्रोजेक्टाइल यानी मिसाइलनुमा वस्तु की चपेट में आ गया था।

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इस हमले के जवाब में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि अमेरिका की तरफ से किए गए इन हवाई हमलों में उनके कई लड़ाके और नागरिक हताहत हुए हैं, जिनमें कुछ लोगों की मौत भी हुई है और कई घायल हुए हैं। ईरान की संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कह दिया कि अब इसका बदला जरूर लिया जाएगा। इसके तुरंत बाद ईरान की तरफ से जॉर्डन में स्थित दो अमेरिकी एयरबेस, किंग Hussein और Azraq पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। ईरान ने दावा किया कि इन हमलों से वहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर और फाइटर जेट खड़े रहने की जगहों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने सोमवार 31 अगस्त को पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल होने वाली आठ मिसाइलों को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया था।

बाजार पर असर और आर्थिक दबाव

दूसरी तरफ राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही बयान दिया था कि वह तेहरान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए बिल्कुल भी जल्दबाजी में नहीं हैं। इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने आर्थिक दबाव को और ज्यादा बढ़ाने के इरादे से एक और अतिरिक्त बैंक पर नए प्रतिबंध लगाने की अपनी योजनाओं का ऐलान कर दिया है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने बताया कि ईरान इस समय हॉर्मूज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अपनी शर्तों का खाका तैयार कर रहा है, जिसमें क्षेत्रीय युद्ध का पूरी तरह से अंत होना उनकी सबसे पहली और मुख्य मांग है।

बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल के पीछे मुख्य वजह सप्लाई में रुकावट आने का पुराना डर है। ऑपरेटरों की तरफ से बरती जा रही अत्यधिक सावधानी के कारण इस रास्ते से आने-जाने वाले कमोडिटी जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने पहले ही यह जानकारी दी थी कि उन्होंने इस इलाके के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूटों से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटा दिया है, लेकिन ईरान का यह कहना है कि उसने जहाजों के बीच होने वाले तेल ट्रांसफर पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। इस तनाव भरे माहौल का असर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले यात्रियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से देखने को मिल रहा है क्योंकि परिवहन और ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ता है।

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