ओमान में ड्रग्स के खिलाफ नया सख्त कानून लागू, तस्करी करने वालों को मिलेगी सीधी मौत की सजा

ओमान में मादक पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों के खिलाफ एक बेहद सख्त नया कानून लागू कर दिया गया है। महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक ने शाही डिक्री संख्या 67/2026 के तहत इस नए कानून को मंजूरी दी है। यह नया कानून आधिकारिक गजट में प्रकाशन के बाद 4 सितंबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गया है। इस नए आदेश के आते ही पुराने कानून को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है ताकि देश को नशामुक्त बनाया जा सके।
कड़े नियमों से घिरे अपराधी और मौत की सजा का प्रावधान
इस नए कानूनी ढांचे के तहत गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के लिए मौत की सजा का कड़ा प्रावधान किया गया है। ड्रग्स की तस्करी करने वाले, बार-बार अपराध करने वाले और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े लोगों को सीधे मौत की सजा दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने 1 जून 2026 को लागू किए गए साइबर अपराध कानून का भी पूरा इस्तेमाल किया है। जो लोग सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ड्रग्स का प्रचार करते पकड़े जाएंगे, उन्हें आजीवन कारावास या मौत की सजा के साथ-साथ 50,000 ओमान रियाल से 100,000 ओमान रियाल तक का भारी जुर्माना भरना होगा।
तस्करी और सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए सजा के नियम
ड्रग्स की खरीद-फरोख्त, रखने, एक जगह से दूसरी जगह ले जाने या बांटने जैसे मामलों में कम से कम 15 साल की जेल की सजा तय की गई है। साथ ही 10,000 से 25,000 ओमान रियाल तक का जुर्माना भी वसूला जाएगा। वहीं, अगर कोई व्यक्ति पहली बार नशा करते पकड़ा जाता है, तो उसे 3 महीने की जेल या 20,000 से 100,000 दिरहम तक का जुर्माना हो सकता है। हालांकि अदालत के पास यह अधिकार है कि वह जुर्माने की जगह अपराधी को अनिवार्य रूप से मेडिकल इलाज के लिए भेज सकती है।
बार-बार अपराध करने वालों पर शिकंजा और इलाज का मौका
अगर कोई व्यक्ति तीन साल के भीतर दूसरी बार ड्रग्स के मामले में पकड़ा जाता है, तो उसे 6 महीने की जेल या 100,000 दिरहम तक का जुर्माना देना होगा। तीसरी बार पकड़े जाने पर सीधे 2 साल की जेल और कम से कम 100,000 दिरहम का जुर्माना लगेगा। सरकार ने उन लोगों को राहत दी है जो खुद आगे बढ़कर इलाज के लिए सामने आते हैं। जो लोग अपनी मर्जी से सरेंडर करते हैं या जिनके परिवार के लोग उन्हें इलाज के लिए भेजते हैं, उन्हें कानूनी मामलों में छूट दी जाएगी। ओमान में ब्लड टेस्ट करवाने से मना करना भी एक गंभीर अपराध माना गया है और स्वास्थ्य मंत्री को इसके नियम तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।