ओमान ने शुरू किया स्काई ब्रिज इनिशिएटिव का दूसरा चरण, ड्रोन से होगी मेडिकल सप्लाई.

ओमान में चिकित्सा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है, जिससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को खासी राहत मिलेगी। 2 सितंबर 2026 को धofar के गवर्नर महामहिम Sayyid Marwan bin Turki Al Said की अध्यक्षता में ग्रीन गल्फ मोबिलिटी फोरम का आयोजन किया गया। इसी कार्यक्रम के दौरान ओमान में 'स्काई ब्रिज' पहल के दूसरे चरण की आधिकारिक शुरुआत की गई, जिसमें 'सह्म' नाम के ड्रोन का इस्तेमाल करके मेडिकल सामान और उपकरण सलालाह से हल्लानियात द्वीप समूह तक पहुंचाए गए। इस पूरी प्रक्रिया को देखने के लिए कई बड़े अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे, जिन्होंने इस आधुनिक तकनीक की काफी सराहना की।
ड्रोन की खासियत और तकनीकी क्षमता
'सह्म' ड्रोन को बहुत ही मजबूत और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है। यह ड्रोन अपने साथ लगभग 150 किलोग्राम तक का भारी वजन उठाकर ले जा सकता है। इसकी रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा है और यह आसमान में 2,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है। इस उड़ान को इब्न फ़िरनवास सेंटर फॉर अनमैंड एरियल व्हीकल्स द्वारा पूरा किया गया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के इलाकों में सामान पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग की तकनीक को जांचना और परखना है, जो कि ओमान विजन 2040 के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करता है। इस पूरी उड़ान पर सिविल एविएशन अथॉरिटी और एयर नेविगेशन विभागों की पूरी नजर थी ताकि सुरक्षा के सभी नियमों का पालन किया जा सके।
पहले चरण की सफलता और भविष्य की योजनाएं
इससे पहले इस योजना का पहला चरण भी बेहद सफल रहा था, जिसमें एक स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए ड्रोन ने 100 किलोग्राम मेडिकल सप्लाई को 100 किलोमीटर की दूरी तय करके मिलिट्री टेक्निकल कॉलेज से अल जबल अल अख़दर तक पहुंचाया था। इस बार के प्रदर्शन के साथ-साथ परिवहन, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सलालाह में 'गल्फ ग्रीन मोबिलिटी सिस्टम लैब' का भी आयोजन किया। इस लैब में पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली परिवहन नीतियों, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चार्जिंग पॉइंट और जीसीसी देशों में लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल को लेकर विस्तार से बातचीत की गई। इस बारे में अधिक जानकारी आप Oman MTICIT की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। सरकार की ऐसी पहलों से आम जनता और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले प्रवासियों को भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मेडिकल सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।