Gulf में काम कर रहे भारतीयों पर मंडराया खतरा, पिछले कुछ सालों में 800 से ज्यादा मजदूरों की मौत

Praggya Singh sabal18 September 20263 min read22 viewsExpat Issues
Gulf में काम कर रहे भारतीयों पर मंडराया खतरा, पिछले कुछ सालों में 800 से ज्यादा मजदूरों की मौत

गल्फ देशों में रोजी-रोटी कमाने जाने वाले भारतीय कामगारों के लिए हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 से 2025 के बीच गल्फ देशों में काम के दौरान 800 से अधिक भारतीय श्रमिकों की जान जा चुकी है। इन मौतों में से करीब 55 प्रतिशत मामले छह जीसीसी (GCC) देशों के भीतर सामने आए हैं, जहां औसतन हर हफ्ते तीन मौतें दर्ज की जा रही हैं। विदेशों में परिवार का पेट पालने गए इन मजदूरों की इस तरह से जान जाना गल्फ में रह रहे और वहां जाने की सोच रहे हर भारतीय परिवार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

सऊदी अरब और यूएई में सबसे ज्यादा मौतें

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि गल्फ देशों में सऊदी अरब में सबसे अधिक 182 भारतीयों की मौत हुई है। इसके बाद यूएई (UAE) का नंबर आता है, जहां इस दौरान 128 भारतीय कामगारों की जान चली गई। इन दर्दनाक मौतों के पीछे कई बड़ी वजहें शामिल हैं। इनमें अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंच जाने वाला भीषण तापमान, काम के दौरान सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी, लगातार 12 घंटे की लंबी शिफ्ट, महीनों तक वेतन न मिलना और लेबर कैंपों में बेहद खराब रहने की स्थिति मुख्य हैं। इसके अलावा इन कैंपों में मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या के मामले भी काफी ज्यादा देखने को मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि कंपनियों की लापरवाही छिपाने के लिए अक्सर इन मौतों को प्राकृतिक मौत या दिल का दौरा बता दिया जाता है ताकि पीड़ित परिवार को किसी भी तरह का मुआवजा न देना पड़े।

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कतर में गैस प्लांट हादसा और समुद्री सुरक्षा का संकट

हाल ही में कतर के रास लाफन बारज़ान गैस सुविधा केंद्र में हुए एक बड़े धमाके ने सबको दहला दिया था। युद्ध काल में हुए नुकसान के बाद प्लांट को दोबारा चालू करने के दौरान हुए इस विस्फोट में कुल 13 मजदूरों की जान चली गई थी, जिनमें 12 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इन सभी मृतकों के शवों को उनके गृह राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, गुजरात और बिहार वापस पहुंचाया गया था। स्थानीय अधिकारियों ने इस गंभीर हादसे को केवल एक तकनीकी खराबी करार दिया था। इसके अलावा 18 सितंबर 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय नाविकों को ले जा रहे जहाजों पर हमले की खबरें आईं। ओमान के तट के पास पनामा के झंडे वाले एक टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाया गया और टोगो के झंडे वाले एक अन्य उत्पाद टैंकर पर ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि इन दोनों घटनाओं में किसी भारतीय की जान जाने की खबर नहीं आई, लेकिन अभी भी 153 भारतीय नाविक विभिन्न जहाजों पर पश्चिमी क्षेत्र में मौजूद हैं। इस गंभीर सुरक्षा खतरे को देखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

दस मिलियन भारतीय और सुरक्षा से जुड़ी अन्य चुनौतियां

मौजूदा समय में लगभग 10 मिलियन यानी एक करोड़ भारतीय जीसीसी देशों में निवास करते हैं। ये लोग वहां की निर्माण साइटों, स्वास्थ्य सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्रों में अपनी मेहनत से रीढ़ की हड्डी का काम कर रहे हैं। हालांकि खाड़ी देशों में भारतीय मिशनों द्वारा सहायता सेवाएं जैसे कि हेल्पलाइन, लेबर विंग और दुबई, रियाद व जेद्दा में प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र चलाए जा रहे हैं, और सऊदी सरकार ने कफाला प्रणाली में कुछ सुधार भी किए हैं, फिर भी कामगारों के सामने खतरे कम नहीं हुए हैं। यूएई में बायोमेट्रिक डेटा से जुड़े फर्जीवाड़े की खबरें भी सामने आई हैं, जहां फर्जी वीजा एजेंट गरीब कामगारों की जानकारी का गलत इस्तेमाल करके उनके नाम पर अवैध कर्ज और यात्रा प्रतिबंध जैसी मुसीबतें पैदा कर रहे हैं। इन सभी मामलों की विस्तृत जानकारी पंचजन्य और बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा 17-18 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के साथ-साथ कतर में भारतीय दूतावास और दुबई में भारत के महावाणिज्य दूतावास के आधिकारिक बयानों से ली गई है, जिन्हें आप Business Standard की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं।

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