Pakistan: बलूचिस्तान में सेना के वाहनों पर बड़ा हमला, झड़प में एक हजार सैन्यकर्मियों के हताहत होने का दावा

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों को एक बार फिर से निशाना बनाए जाने की बड़ी खबर सामने आ रही है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रांत के विभिन्न इलाकों में हुए इन हमलों में भारी संख्या में सैनिकों के हताहत होने का गंभीर दावा किया गया है। आम लोगों की समझ के अनुसार यह घटना क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को और ज्यादा गंभीर बनाती है, जहां आए दिन सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है। इस पूरी घटना के बाद से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को काफी ज्यादा कड़ा कर दिया गया है और आम जनजीवन भी इससे काफी हद तक प्रभावित हुआ है।
खारान और पंजगुर जिलों में सैन्य गाड़ियों को बनाया गया निशाना
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बलूचिस्तान के खारान और पंजगुर जिलों में हथियारबंद लोगों ने पाकिस्तान की सेना के वाहनों पर जोरदार हमला बोल दिया। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि खारान शहर के पास सेना की कम से कम तीन गाड़ियों पर सीधी फायरिंग की गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती रिपोर्ट्स में यह हैरान करने वाला दावा किया गया है कि इस हमले में लगभग 1,000 सैन्यकर्मी मारे गए या फिर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि, इस बड़े दावे पर अभी तक पाकिस्तान सरकार या संघीय सेना की ओर से कोई भी आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है और न ही किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
राशन ले जा रही गाड़ी में लगाई गई आग और सर्विलांस कैमरे नष्ट
पंजगुर जिले के प्रोम इलाके में बंदूकधारियों ने सेना के लिए राशन ले जा रही एक गाड़ी को रोककर उसमें आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा, हथियारबंद लोगों ने सेना की एक अन्य गाड़ी पर भी अपना कब्जा जमा लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पंजगुर के चिडगी इलाके में एक रिहायशी जगह पर आग लगने की घटना के दौरान पाकिस्तान की सेना द्वारा लगाए गए सभी सर्विलांस कैमरों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। बलोच आजादी समर्थक संगठन इस तरह की घटनाओं को अक्सर अंजाम देते रहे हैं, लेकिन ताजा मामलों में फिलहाल किसी ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।
मानवाधिकार उल्लंघन और जबरन गायब किए जाने का गंभीर मामला
इस बीच, बलूचिस्तान से एक अन्य मानवीय चिंता का मामला भी सामने आया है, जहां संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान निवासी इमरान अली को जबरन गायब किए जाने और उसकी न्यायेतर हत्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार से इस पूरे मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच करने का कड़ा आग्रह किया है। बताया गया है कि पिछले साल 27 अगस्त को आतंकवाद रोधी विभाग के करीब 20 अधिकारियों ने अली को उसके अपार्टमेंट से अगवा कर लिया था और उसे किसी अज्ञात जगह पर ले गए थे। परिवार को एक साल तक उसके ठिकाने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी।
जांच आयोग के समक्ष हुई हालिया सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि इमरान अली की मई 2026 में एक कथित मुठभेड़ में मौत हो गई थी और उसके शव को शिनाख्त में देरी के चलते जून 2026 में दफना दिया गया था। परिजनों ने क्वेटा के सिविल अस्पताल पहुंचकर रिकॉर्ड की तस्वीरों के जरिए शव की पहचान की। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि बिना किसी दस्तावेज और बिना परिवारों को सूचना दिए इस तरह शवों को दफनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। बलूचिस्तान के इन हालातों को देखते हुए विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि ऐसे अन्य मामलों में भी लापता लोगों के साथ अनहोनी हो सकती है।