मक्का समझौता सिर्फ रक्षात्मक गठबंधन, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने किया साफ़, नहीं बढ़ेगा दायरा.

Aanya10 September 20262 min read30 viewsSaudi
मक्का समझौता सिर्फ रक्षात्मक गठबंधन, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने किया साफ़, नहीं बढ़ेगा दायरा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 10 सितंबर 2026 को यह साफ़ कर दिया है कि मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पूरी तरह से एक रक्षात्मक गठबंधन है। इस समझौते के तहत फिलहाल इसके दायरे को बढ़ाने या किसी नए देश को इसमें शामिल करने की कोई योजना नहीं है। इस अहम समझौते पर आधिकारिक तौर पर 7 अगस्त 2026 को सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman, तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने हस्ताक्षर किए थे। इस डील से पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच एक त्रिपक्षीय सुरक्षा ढांचा तैयार हुआ है।

कब्ज़े और क्षेत्र की सुरक्षा पर बड़ा बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने भी 10 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि अगर यमन का चल रहा संघर्ष सऊदी अरब की सीमा तक फैलता है, तो यह समझौता तुरंत सक्रिय हो सकता है। ख्वाजा आसिफ ने यह जोर देकर कहा कि यह गठबंधन किसी भी देश पर हमला करने के लिए नहीं है, हालांकि इसमें भविष्य में दूसरे देशों को भी जोड़ने का विकल्प रखा गया है, लेकिन अभी ऐसा कोई एजेंडा सामने नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु संपन्न देश के रूप में अपनी पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने के लिए हमेशा तैयार रहता है।

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यह समझौता ठीक नाटो के Article 5 की तरह काम करता है, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने पर उसे सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। यह नया त्रिपक्षीय समझौता 17 सितंबर 2025 को पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के आधार पर ही तैयार किया गया है। उस शुरुआती समझौते के बाद ही पाकिस्तान ने अपने सैनिक, जेएफ-17 फाइटर जेट और चीन में बने एचक्यू-9 एयर-डिफेंस सिस्टम को सऊदी अरब में तैनात कर दिया था, जिसका सारा खर्च सऊदी सरकार द्वारा उठाया गया था।

हालिया हमलों और क्षेत्रीय तनाव का असर

ये सारे बयान तब सामने आए हैं जब हाल ही में हौथी विद्रोहियों की तरफ से सऊदी अरब के आम लोगों और ऊर्जा ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए थे। इन हमलों में मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुल 73 लोग घायल हुए थे। इन लगातार हमलों के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाने का ऐलान किया था। जानकार मानते हैं कि यह समझौता मध्य पूर्व के बदलते हालातों और क्षेत्रीय अस्थिरता से निपटने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम है, जिसमें सऊदी अरब पैसों से मदद कर रहा है, तुर्की अपनी आधुनिक सैन्य तकनीक दे रहा है और पाकिस्तान अपने सैनिक और जनशक्ति मुहैया करा रहा है।

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