सऊदी अरब पर हुए हमलों की पाकिस्तान ने की निंदा, मक्का डिफेंस समझौते पर कही बड़ी बात.

हाल ही में 10 सितंबर 2026 को पाकिस्तान सरकार की तरफ से एक बड़ा बयान सामने आया है जिसमें होती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के कई शहरों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई है। इन हमलों की वजह से आम नागरिकों और आर्थिक ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है और सऊदी अरब के कई इलाकों में तनाव का माहौल बन गया है। इस पूरी घटना के बाद से खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और आम लोग भी हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान का बड़ा बयान
10 सितंबर 2026 को हुए इन हमलों में सऊदी अरब के शहर अभा, खमीस मुशायत, جازان (Jazan) और नजरान को निशाना बनाया गया था। इन हमलों की चपेट में आने से कुल 73 लोग घायल हो गए जिसके बाद सऊदी बलों ने भी यमन में जवाबी कार्रवाई की। इन तमाम घटनाओं के बीच पाकिस्तान ने साफ तौर पर कहा है कि वह सऊदी अरब की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और किसी भी खतरे के समय मदद के लिए तैयार है।
मक्का ज्वाइंट डिफेंस समझौते पर चर्चा
बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तानी अधिकारियों ने अगस्त 2026 में साइन किए गए मक्का ज्वाइंट डिफेंस समझौते का जिक्र किया है। यह एक त्रिपक्षीय समझौता है जो पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ था। इस समझौते के नियमों के मुताबिक अगर किसी एक देश पर भी हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 9 सितंबर 2026 को यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि सऊदी अरब के खिलाफ आक्रामकता जारी रहती है तो इस समझौते को तुरंत लागू किया जाएगा।
फिलहाल सीधी सैन्य दखल की कोई योजना नहीं
दूसरी तरफ पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने 10 सितंबर को स्थिति साफ करते हुए बताया कि हालांकि यह समझौता पूरी तरह से लागू है लेकिन अभी किसी भी तरह की सीधी सैन्य कार्रवाई करने की कोई तुरंत योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के रक्षा सहयोग वाले हिस्से को पूरी तरह से जमीन पर उतारने में अभी कुछ समय लगेगा और सही वक्त आने पर ही पाकिस्तान कोई अगला कदम उठाएगा। फिलहाल सऊदी अरब में मौजूद पाकिस्तानी सैनिक मुख्य रूप से केवल ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स के कामों में ही लगे हुए हैं।
ईरान से कूटनीतिक बातचीत जारी
इस पूरे मामले को शांत करने के लिए इस्लामाबाद ने आधिकारिक तौर पर ईरान से यह अपील की है कि वह होती ताकतों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे ताकि हिंसा को आगे बढ़ने से रोका जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय सऊदी अरब और ईरान के बीच एक कूटनीतिक पुल की तरह काम कर रहा है और दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचा रहा है। सरकार की प्राथमिकता हमेशा से ही सीधे युद्ध की बजाय बातचीत और कूटनीतिक तरीकों से मामलों को सुलझाने की रही है ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।