मक्का अलायंस पर पाकिस्तान का बड़ा बयान, इसे बताया सिर्फ बचाव का रास्ता और विस्तार से किया इनकार।

Praggya Singh sabal10 September 20262 min read29 viewsSaudi
मक्का अलायंस पर पाकिस्तान का बड़ा बयान, इसे बताया सिर्फ बचाव का रास्ता और विस्तार से किया इनकार।

पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह साफ कर दिया है कि मक्का अलायंस को लेकर उनका रुख पूरी तरह से स्पष्ट है और इसमें किसी भी तरह की तुरंत बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। 10 सितंबर 2026 को दिए गए आधिकारिक बयान में यह बताया गया कि यह समझौता केवल एक रक्षात्मक सुरक्षा व्यवस्था है। इस समझौते पर मूल रूप से 7 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की शामिल हैं। इस समझौते के तहत यदि किसी भी सदस्य देश पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।

हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद आई बड़ी परीक्षा

यह सुरक्षा समझौता ऐसे समय में अपनी पहली बड़ी परीक्षा का सामना कर रहा है जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के शहरों और तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। ये हमले 8 और 9 सितंबर 2026 को किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 73 नागरिक घायल हो गए और औद्योगिक साइटों को भी कुछ समय के लिए नुकसान का सामना करना पड़ा। इस स्थिति के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और हर कोई इस नए गठबंधन के फैसलों पर नजर बनाए हुए है।

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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खवाजा आसिफ ने 9 सितंबर 2026 को इस बात पर जोर दिया कि यदि ईरान समर्थित हूती मिलिशिया का संघर्ष सऊदी अरब की सीमा के अंदर फैलता है, तो यह रक्षा समझौता पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बात को लेकर किसी के मन में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि सामूहिक रक्षा की जिम्मेदारी क्या है, हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि इस समझौते के तहत किसी भी सदस्य देश को पहले हमला करने की अनुमति नहीं दी जाती है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हूती विद्रोहियों के इन हमलों की कड़ी निंदा की और सऊदी अरब के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है।

सऊदी अरब में बनेगा सचिवालय

इस गठबंधन को चलाने के लिए 31 अगस्त 2026 को इस्तांबुल में रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तَيिप एर्दोगन शामिल हुए थे। इस बैठक में यह तय किया गया कि सऊदी अरब में एक नया सचिवालय बनाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शुरुआती तीन सालों के लिए पाकिस्तान के पास होगी।

हालाँकि पाकिस्तान ने यह साफ कर दिया है कि इस समूह में अभी किसी अन्य देश को तुरंत शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने 31 अगस्त 2026 को यह संकेत दिया था कि यह गठबंधन भविष्य में कुछ खास शर्तों के तहत अन्य साझेदारियों के लिए खुला रहेगा। इसके अलावा, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी 7 सितंबर 2026 को यह सुझाव दिया था कि ईरान भी भविष्य में इस रक्षा संधि का हिस्सा बन सकता है।

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