पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर जमीयत प्रमुख का बड़ा बयान, कहा देश की नींव बाहरी कर्ज पर टिकी.

Aanya8 September 20263 min read17 viewsWorld
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर जमीयत प्रमुख का बड़ा बयान, कहा देश की नींव बाहरी कर्ज पर टिकी.

पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों आर्थिक नीतियों को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल यानी JUI-F के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने देश की हुकूमत पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने लाहौर के वहदत रोड क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित एक बड़े सम्मेलन के दौरान खुलकर बात की और बताया कि किस तरह से देश की आर्थिक नीतियां बाहर से तय की जा रही हैं। उनके इस बयान के बाद से देश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर कब तक देश बाहरी कर्ज के सहारे चलता रहेगा।

विदेशी कर्जदाताओं पर बढ़ती निर्भरता

मौलाना फजलुर रहमान ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक नींव पूरी तरह से बाहरी कर्ज पर खड़ी कर रखी है। उन्होंने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF से लिए जाने वाले भारी-भरकम कर्ज का हवाला देते हुए कहा कि आज भले ही औपनिवेशिक शासन खत्म हो चुका हो, लेकिन हमारे देश के लिए अहम फैसले अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही तय करती हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर आर्थिक नीतियां बाहर से तय हो रही हैं, तो यह सीधे तौर पर उपनिवेशवाद का ही एक दूसरा रूप है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान यहां के आम लोगों का देश है और एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए शांति तथा जन-सुरक्षा का होना सबसे ज्यादा जरूरी है, लेकिन इसके विपरीत देश लगातार बंटवारे और आंतरिक संघर्षों का सामना कर रहा है।

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मुस्लिम दुनिया और राजनीतिक हालात पर चिंता

धार्मिक नेता ने मुस्लिम दुनिया को आपस में बांटने वाली ताकतों पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनकी पार्टी देश के गरीबों को एक सम्मानजनक जीवन देना चाहती है। उन्होंने दो टूक कहा कि अमीर और दमनकारी राजनीति अब देश में नहीं चलेगी और ना ही आम जनता पर अपनी ताकत को जबरन थोपने वाली राजनीति सफल होगी। इसके अलावा उन्होंने देश के ईशनिंदा कानूनों को रद्द करने की कोशिश करने वाले हर कदम का कड़ाई से विरोध करने की बात कही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एडमिनिस्ट्रेटिव ढांचे में किसी भी तरह के बड़े बदलाव को अचानक से थोपने से बचना चाहिए क्योंकि लगातार बनती और बिगड़ती नीतियों ने देश की राजनीतिक और आर्थिक नींव को अंदर से खोखला कर दिया है।

नए प्रांतों के गठन और राजनीतिक दलों पर सवाल

नए प्रांत बनाने की चर्चा पर बोलते हुए जमीयत प्रमुख ने मांग की कि ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले देश में व्यापक राजनीतिक बहस होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 6 सितंबर 1965 का दिन पाकिस्तान की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक और बेहद अहम था, और देश तभी मजबूत बन सकता है जब वहां के आम नागरिक सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें। उन्होंने अफसोस जताया कि राजनीतिक बंटवारे ने देश को कमजोर किया है। उन्होंने 18वें संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि खनिज संसाधनों पर प्रांतों का अधिकार होता है और सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानी PPP और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज यानी PML-N जैसे बड़े राजनीतिक दलों की आलोचना करते हुए कहा कि एक दल ने इस मुद्दे पर सिर्फ अपने राज्य के संदर्भ में बात की जबकि दूसरा दल पूरी तरह खामोश बैठा रहा। उन्होंने देश की संयुक्त राष्ट्रीय पहचान न बन पाने के पीछे जातीय बंटवारे और दो-राष्ट्र सिद्धांत के विफल होने को मुख्य वजह बताया।

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