Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के मंत्री इशाक डार ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के फैसले पर उठाया सवाल, कही बड़ी बात

पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने एक बार फिर से सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका में एक वर्चुअल सेमिनार के दौरान भारत के उस फैसले पर सवाल उठाया जिसमें 1960 की इस संधि को स्थगित यानी आस्थगित कर दिया गया था। पाकिस्तानी दूतावास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में डार ने कहा कि यह संधि पूरी तरह से वैध और लागू रहने योग्य है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते को एकतरफा तरीके से निलंबित करने का कोई प्रावधान नहीं है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत राजनीतिक बयानों के जरिए ऐसी संधियों को खत्म नहीं किया जा सकता है।
संधि को लेकर दोनों देशों का रुख
इशाक डार ने अपने संबोधन में कहा कि पानी की सुरक्षा पाकिस्तान की राष्ट्रीय स्थिरता का एक मुख्य आधार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश को उसके हिस्से के पानी से वंचित किया गया, तो इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा उत्पादन पूरी तरह से पानी पर निर्भर करते हैं और खतरे में हैं। उन्होंने तकनीकी बातचीत, पारदर्शिता और डेटा शेयरिंग को फिर से शुरू करने की मांग की है। उनका कहना था कि पानी को हथियारों की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना दोनों देशों के लिए बेहतर होगा। इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ANI News पर जा सकते हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच यह विवाद तब और गहरा गया जब अप्रैल 2025 में भारत ने पहलगाम में पर्यटकों पर हुए एक हमले के बाद इस संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। नई दिल्ली ने इस हमले के पीछे सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया था। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले भी यह बात साफ की है कि पाकिस्तान द्वारा कई दशकों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना उस सद्भावना की भावना का खुला उल्लंघन है जिसके तहत इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने भी यह कहा है कि भारत का मौजूदा रुख पाकिस्तान के उन तौर-तरीकों को जवाब है जिन्होंने इस संधि के सिद्धांतों को नुकसान पहुंचाया है।
सिंधु जल संधि का इतिहास
आपको बता दें कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से यह ऐतिहासिक समझौता हुआ था। इसके तहत ब्यास, रावी और सतलज नदियों का पानी भारत को आवंटित किया गया था, जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को दिया गया था। दोनों देशों के बीच लगातार जारी तनाव और मतभेदों के बावजूद, इस्लामाबाद का लगातार यह कहना है कि इस संधि को संघर्ष की वजह बनाने के बजाय दोनों देशों के बीच एक पुल के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम और भारत के कड़े रुख के बारे में अधिक जानकारी आप इस रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।