Pakistan New Law: पाकिस्तान में सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मिली व्यापक शक्तियां, कार्यकाल 2030 तक बढ़ा.

Aanya4 September 20263 min read42 viewsWorld
Pakistan New Law: पाकिस्तान में सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मिली व्यापक शक्तियां, कार्यकाल 2030 तक बढ़ा.

पाकिस्तान में सेना की ताकत को और अधिक बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। देश में नए कानून के तहत सैन्य प्रमुख Field Marshal Asim Munir को बहुत सारे अधिकार दे दिए गए हैं। इस नए बदलाव से सेना का प्रभाव देश में और ज्यादा मजबूत हो गया है। सरकार के इस कदम की चर्चा अब चारों तरफ हो रही है क्योंकि इससे देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है।

नया कानून और सैन्य शक्तियां

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली से पास होने के बाद 20 August 2026 को इन नए नियमों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद Defence Forces of Pakistan Act, 2026 और National Command Authority Act, 2010 में जरूरी संशोधन किए गए। इन संशोधनों के जरिए सेना प्रमुख को देश की तीनों सेनाओं यानी थल सेना, जल सेना और वायु सेना के ऑपरेशनल कमांड और कंट्रोल की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

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मई 2025 में फील्ड मार्शल के रूप में प्रमोट हुए आसिम मुनीर अब दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। वह देश के Chief of Army Staff (COAS) होने के साथ-साथ नए बने Chief of Defence Forces (CDF) भी हैं। इस नए कानून की वजह से उनका कार्यकाल अब रीसेट हो गया है और वह साल 2030 तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। इस समयावधि में देश का अगला आम चुनाव भी होना है।

हाइब्रिड मॉडल और रक्षा मंत्री का बयान

देश के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने इस पूरी राजनीतिक व्यवस्था को एक 'हाइब्रिड मॉडल' करार दिया है। उनके मुताबिक यह नागरिक और सैन्य नेतृत्व के बीच शक्तियों को साझा करने का एक नया तरीका है। नए नियमों के अनुसार चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा मामलों के मुख्य सैन्य सलाहकार के रूप में काम करते हैं।

इसके अलावा फील्ड मार्शल मुनीर को सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति, सेवानिवृत्ति, छुट्टी देने और उनके इस्तीफे स्वीकार या अस्वीकार करने के मामले में बड़े अधिकार मिल गए हैं। वह नए बने Defence Forces Headquarters (DFHQ) की देखरेख भी करते हैं। सबसे खास बात यह है कि इस कानून के तहत सेना प्रमुख को आजीवन कानूनी छूट दी गई है, जो उनके कार्यकाल के खत्म होने के बाद भी लागू रहेगी।

राजनीतिक और न्यायिक हलचल

साल 1976 के बाद से इसे देश का सबसे बड़ा सैन्य सुधार माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह सेना के प्रभाव को कानूनी रूप से स्थापित करने जैसा है। वहीं दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से आम नागरिकों के लिए राजनीतिक जगह कम होती जा रही है। यह पूरा विधायी दौर काफी विवादों में रहा और विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए संसद से वॉकआउट भी किया था।

इस पूरे बदलाव के पीछे साल 2025 के नवंबर महीने में पास किया गया 27th Constitutional Amendment भी है। इस संशोधन ने देश की न्याय व्यवस्था को भी बदल कर रख दिया है। इसके तहत एक नई फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट बनाई गई है और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों में बदलाव किया गया है। इस कदम का विरोध करते हुए कुछ न्यायूर्तियों ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था और इसे संविधान पर एक बड़ा हमला बताया था।

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