Pakistan का बड़ा ऐलान, अमेरिका के ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को मानने से किया साफ़ इंकार.

पाकिस्तान ने अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। 27 अगस्त 2026 को इस्लामाबाद में एक साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंदरीबी ने यह स्पष्ट किया कि उनका देश ईरान पर अमेरिकी पाबंदियों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और क्षेत्रीय विवादों को आर्थिक दबाव के बजाय केवल बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। इस बयान के बाद से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा पार व्यापार सामान्य रूप से जारी रहेगा।
यह घोषणा अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट द्वारा 24 अगस्त 2026 को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए शुरू की गई नई प्रतिबंध श्रृंखला के बाद सामने आई है। इस संबंध में अधिक जानकारी US Treasury Department की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है। हालांकि वाशिंगटन ने उन देशों को निशाना बनाने का संकेत दिया है जो ईरानी अर्थव्यवस्था के साथ व्यापार कर रहे हैं, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के कारण ये नए प्रतिबंध उम्मीद से थोड़े नरम हैं।
इस्लामाबाद समझौता और कूटनीतिक प्रयास
पाकिस्तान वर्तमान में इस्लामाबाद समझौता के तहत बातचीत को फिर से शुरू करने पर काम कर रहा है, जिसे 17 जून 2026 को 2026 के ईरान युद्ध के बाद की स्थिति को संभालने के लिए हस्ताक्षर किया गया था। पिछले हफ्ते 60 दिन के युद्धविराम की समय सीमा समाप्त हो गई थी, और पाकिस्तान ने सीधी बातचीत फिर से शुरू करने के लिए 60 दिन का एक नया प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर की हालिया तेहरान यात्रा एक द्विपक्षीय और क्षेत्रीय शांति पहल थी, और उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए विशेष दूत के रूप में गए थे।
क्षेत्रीय तनाव और अन्य गतिविधियां
मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है और 27 अगस्त 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमले की खबर सामने आई है। ईरानी अधिकारियों, जिनमें विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई शामिल हैं, ने अमेरिकी प्रतिबंधों को एक मज़ाक करार दिया है, जबकि संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने अमेरिकी नीति के विरोध के लिए चीन की तारीफ की है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने बताया कि इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि ईरान वर्तमान में अपने परमाणु संयंत्रों को फिर से बना रहा है।