फिलीस्तीन में अपनों के शव वापस पाने के लिए जोरदार प्रदर्शन, इजराइल पर उठे गंभीर सवाल

फिलीस्तीन के कब्जे वाले वेस्ट बैंक इलाके में सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का मुख्य मकसद इजराइल के कब्जे से अपने मरे हुए लोगों के शवों को वापस पाना और लापता लोगों के बारे में जानकारी हासिल करना था। फिलीस्तीनी नागरिकों ने सरकार और सेना से मांग की कि उनके परिजनों के शव उन्हें सौंपे जाएं ताकि वे उनका अंतिम संस्कार ठीक से कर सकें।
कब्जे वाले वेस्ट बैंक में कई जगहों पर हुए प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन 26 अगस्त 2026 को आयोजित किए गए थे। नेशनल कैंपेन टू रिट्रीव मार्टीज बॉडीज नाम के संगठन ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। वेस्ट बैंक के कई बड़े शहरों जैसे अल-बिरेह, नाबुलस, हेब्रोन, तुलकरम, कालकिलिया, टुबास और बेथलेहम में लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। इन आयोजनों का समय बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि यह सब फिलीस्तीन के राष्ट्रीय दिवस यानी फिलीस्तीनी और अरब शहीदों के शवों की वापसी का राष्ट्रीय दिवस से ठीक एक दिन पहले हुआ, जिसे हर साल 27 अगस्त को मनाया जाता है।
इजराइल के पास हैं 1700 से ज्यादा शव
इस कैंपेन के कोऑर्डिनेटर हुसैन शुजाइया ने मीडिया को बताया कि इस समय इजरायली अधिकारियों के पास मॉर्ग, मिलिट्री कैंप और गुप्त कब्रों में 1,700 से ज्यादा फिलीस्तीनियों के शव मौजूद हैं। इन गुप्त जगहों को नंबरों वाली कब्रें कहा जाता है, जहां शवों के नाम की जगह सिर्फ नंबर लिखे होते हैं। कैंपेन के दस्तावेजों के मुताबिक, 256 शवों को ऐसी ही नंबर वाली कब्रों में रखा गया है, जबकि 544 शवों को साल 2015 में नियम बदलने के बाद से रोक कर रखा गया है। इसके अलावा, एक फिलीस्तीनी निगरानी समूह के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि इजराइल ने साल 1967 से लेकर अब तक लगभग 800 शवों को रोककर रखा है, जिनमें महिलाओं और बच्चों के शव भी शामिल हैं। हाल ही का मामला जेनिन शहर के एक कमांडर फाथी खजेम का है, जिन्हें पिछले हफ्ते मार दिया गया था और उनका शव भी अभी तक परिवार को नहीं दिया गया है।
कानूनी पहलू और मानवाधिकार संगठनों की आपत्तियां
फिलीस्तीनी संस्थानों ने 26 अगस्त 2026 को एक साझा बयान जारी करके इस पूरी कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उनका कहना था कि शवों को रोककर रखना परिवारों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है क्योंकि इससे घरवाले अपने प्यारों को आखिरी बार देख भी नहीं पाते हैं। इस मामले में कानूनी पक्ष को देखें तो जनवरी 2017 में इजरायली सुरक्षा कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पास किया था जिसके तहत हमास या गंभीर हमलों से जुड़े लोगों के शवों को रोकने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद सितंबर 2019 में इजराइल की सुप्रीम कोर्ट ने भी यह फैसला सुनाया कि देश की सुरक्षा और इजरायली सैनिकों के शवों की वापसी के लिए सरकार इन शवों को अपने पास रख सकती है।
दूसरी तरफ, अदालत और यूरो-मेड ह्यूमन राइट्स मॉनिटर जैसे कई बड़े मानवाधिकार संगठनों का साफ कहना है कि शवों को रोककर रखना सामूहिक सजा देने जैसा है और यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का साफ उल्लंघन है। हालांकि इसके उलट, यूएन वाच संगठन का मानना है कि यह नीति पहले जिनेवा कन्वेंशन के खिलाफ नहीं है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए ReliefWeb Report पर पूरी रिपोर्ट देख सकते हैं। गाजा पट्टी जैसे इलाकों में हालात बहुत खराब होने के कारण लापता लोगों का सही आंकड़ा जुटाना बेहद मुश्किल है, जहां आज भी हजारों लोग लापता हैं।