गजा सिटी में मिला 100 लोगों का शव, हजारों फिलिस्तीनियों ने मिलकर किया सामूहिक अंतिम संस्कार.

गाजा सिटी के Zeitoun इलाके में मलबे के नीचे से निकाले गए 100 लोगों के अवशेष के लिए रविवार, 6 सितंबर 2026 को हजारों फिलिस्तीनी एक साथ आए और उन्होंने मिलकर एक बड़ा सामूहिक अंतिम संस्कार किया। यह बचाव अभियान गाजा के Civil Defense टीमों द्वारा International Committee of the Red Cross (ICRC) के साथ मिलकर चलाया गया, जो पिछले साल 19 जुलाई से शुरू हुए अभियान का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, जिसका मकसद संघर्ष के दौरान तबाह हुए घरों के मलबे से शवों को बाहर निकालना है।
बचाव कार्य में आ रही हैं भारी मुश्किलें
इस प्रोजेक्ट के इंचार्ज कर्नल मोहम्मद अबू दान ने बताया कि राहत और बचाव के कामों में भारी मशीनों जैसे बुलडोजर, एक्सेवेटर और ट्रकों की बहुत कमी खल रही है, जिसकी वजह से काम में रुकावट आ रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों से अपील की है कि वे आधुनिक उपकरण भेजें ताकि इस मिशन को आसानी से पूरा किया जा सके। इस समय यह टीम 147 जगहों पर करीब 800 घंटे काम कर चुकी है, जहां मलबे के नीचे अभी भी अनुमानित 1,072 शव दबे हुए हैं।
एक ही परिवार के 55 लोगों की हुई पहचान
बीते 5 सितंबर को जो शव निकाले गए थे, उनमें से अकेले 55 शव Malaka परिवार के लोगों के थे, जिन्होंने एक ऐसी इमारत में शरण ली थी जिसे इजरायली हमले में करीब दो साल पहले पूरी तरह तबाह कर दिया गया था। इसके अलावा Rahim, Balawi, Qanbour और Salmi परिवारों के सदस्यों की भी पहचान मृतकों के रूप में की गई है। इस दुखद माहौल के बीच लोगों का दर्द साफ झलक रहा था क्योंकि कई परिवारों ने अपने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े
गाजा में मौजूद Palestinian Ministry of Health की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इजरायली हमलों में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 73,651 हो गई है, जबकि इस दौरान 174,575 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, जब से 10 अक्टूबर 2025 को युद्धविराम लागू हुआ है, तब से लेकर अब तक 1,344 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 4,464 लोग घायल हुए हैं, जबकि मलबे से कुल 815 शवों को बाहर निकाला जा चुका है। इससे पहले अगस्त महीने की शुरुआत में भी Sabra इलाके से बरामद 112 फिलिस्तीनियों के शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया था, जो वहां चल रहे गंभीर मानवीय संकट को साफ तौर पर बयां करता है।