फ्रांस की राजधानी पेरिस में बना पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 40 से अधिक देशों के श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा.

Sushma Kumari6 September 20263 min read17 viewsWorld
फ्रांस की राजधानी पेरिस में बना पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 40 से अधिक देशों के श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा.

फ्रांस की राजधानी पेरिस के बुसी-सेंट-जॉर्जेस इलाके में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जहां पारंपरिक हिंदू मंदिर में कई देवी-देवताओं और भारतीय गुरुओं की प्राण-प्रतिष्ठा पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हो गई। इस भव्य आयोजन के साथ ही 13 दिनों तक चले धार्मिक महोत्सव का समापन भी हो गया। इस विशेष अवसर पर भारत, अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड समेत 40 से भी अधिक देशों के लोग शामिल हुए, जिससे पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति की गूंज सुनाई दी।

वैदिक मंत्रोच्चार और संतों की उपस्थिति में हुई प्राण-प्रतिष्ठा

प्रातः काल वरिष्ठ संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महापूजा विधि का प्रारंभ किया। इस दौरान श्री अक्षरपुरुषोत्तम महाराज, घनश्याम महाराज, राधा-कृष्ण भगवान, सीता-राम भगवान संग लक्ष्मण जी एवं हनुमानजी महाराज, पार्वती-शंकर भगवान संग श्री कार्तिकेय एवं गणेशजी महाराज, पद्मावती वेंकटेश्वर भगवान, अय्यप्पा स्वामी जी, नीलकंठवर्णी महाराज और गुरु परंपरा की मूर्तियों की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न की गई। इस पावन अवसर पर यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के संतों व भक्तों सहित विश्वभर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने सभी धर्मों के बीच आपसी प्रेम-सद्भाव बना रहने और वैश्विक शांति के लिए इस मंदिर में प्रथम प्रार्थना की।

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पेरिस की सड़कों पर निकली भव्य नगर यात्रा

मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले पेरिस शहर में एक भव्य नगर यात्रा का आयोजन किया गया था। इस यात्रा में संगीत, कला और भक्तिमय प्रस्तुतियों की अद्भुत छटा देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे नृत्य कलाकारों के साथ 14 सुंदर ढंग से सुसज्जित रथों पर सवार मूर्तियों को नगर भ्रमण कराया गया। यह आध्यात्मिक नगर यात्रा विश्वविख्यात एफिल टावर और एकोल मिलिटेर होते हुए प्लास द ला कॉनकॉर्ड पहुंचकर पूर्ण हुई। इस नगरयात्रा से फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रेम और सौहार्द्र भावना का एक नया अध्याय शुरू हुआ।

मंदिर निर्माण से जुड़ा लंबा इतिहास

बीएपीएस स्वामीनारायण संस्थान से जुड़े साधु ज्ञानानंद ने जानकारी दी कि पेरिस में एक भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प गुरु योगीजी महाराज ने वर्ष 1970 में किया था। इसके बाद प्रमुख स्वामी महाराज ने इस संकल्प को पूरा करने के लिए फ्रांस में सत्संग की नींव रखी थी। आगे चलकर वर्ष 2021 में वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में मंदिर का भूमि पूजन हुआ और वर्ष 2022 में शिलान्यास विधि संपन्न की गई। लंबी मेहनत के बाद वर्ष 2026 में इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरी तरह से पूर्ण हुआ।

मंदिर की बनावट और भव्यता

यह पारंपरिक हिंदू मंदिर लगभग पांच हजार वर्गमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके ऊपरी तल में पारंपरिक मंदिर और आधार में सांस्कृतिक केंद्र के रूप में एक सुंदर भवन बनाया गया है। इसके निर्माण में भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम जैसे देशों से प्राप्त संगमरमर तथा ग्वालियर के बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। इस मंदिर में 5 शिखर, 10 विशाल गुंबद, 20 नक्काशीदार स्तंभ, 120 गवाक्ष, 49 चरित्र शिल्प प्रतिमाएं और 4 सुसज्जित छतरियां बनाई गई हैं। मंदिर परिसर के भीतर सभागृह, कक्षाएं, खेलकक्ष, प्रदर्शनी स्थल और कार्यालय जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। फ्रांस की धरती पर स्थापित यह प्रथम पारंपरिक हिंदू मंदिर विश्व भर के लोगों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने का एक बड़ा माध्यम बनेगा।

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