Qatar का कड़ा रुख, ईरान द्वारा जॉर्डन पर मिसाइल हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन।

Aanya9 September 20263 min read37 viewsQatar
Qatar का कड़ा रुख, ईरान द्वारा जॉर्डन पर मिसाइल हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन।

कतर देश की सरकार ने जॉर्डन पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है और इस सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन करार दिया है। कतर के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में यह साफ कहा गया है कि इस तरह के हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानूनों और पड़ोसी देशों के साथ शांति से रहने के बुनियादी सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार का सैन्य तनाव पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन रहा है। आम आदमी और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि इस तरह के टकराव से क्षेत्रीय शांति बिगड़ सकती है।

घटना की पूरी जानकारी और तारीख

यह पूरी घटना 9 सितंबर 2026 की है जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने जॉर्डन के अजरक इलाके में स्थित मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी थी। ईरान के इस संगठन ने इस हमले को एक दंडात्मक कार्रवाई बताया और कहा कि यह अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए किया गया है। ईरान का दावा था कि इन मिसाइलों ने रखरखाव सुविधाओं और लड़ाकू विमानों जैसे F-35, F-16 और F-15 के ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, इन दावों की किसी भी स्वतंत्र एजेंसी या संगठन द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और नुकसान की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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जॉर्डन की सेना का जवाब

जॉर्डन की सशस्त्र सेना ने अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए यह साफ किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी क्षेत्र से दागी गई कुल 20 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 18 मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। बाकी बची हुई दो मिसाइलें खाली इलाकों में आकर गिरीं, जिससे किसी भी तरह का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ और सभी अधिकारी सुरक्षित रहे। जॉर्डन सरकार ने देश की संप्रभुता और अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराया है। इस घटना से क्षेत्र में रह रहे लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर फिक्र होने लगी है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि

यह मिसाइल हमला ठीक एक दिन पहले यानी 8 सितंबर 2026 को भड़के तनाव के बाद हुआ, जब अमेरिकी सेना ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया था। यह कार्रवाई तब की गई जब IRGC के लोगों ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की थी। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बयान दिया कि अमेरिका समुद्री हमलों का जवाब देने के लिए ईरानी जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेगा। इसके साथ ही, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने भी साफ चेतावनी दी कि अमेरिका अपनी सेनाओं की रक्षा करने में पीछे नहीं हटेगा और जरूरत पड़ने पर ईरान के तेल बेड़े को पूरी तरह तबाह कर देगा।

कतर की सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में सभी प्रकार की सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने की अपील की है। इसके साथ ही, सभी पक्षों से यह आग्रह किया गया है कि वे दोबारा कूटनीतिक बातचीत के रास्ते पर लौटें ताकि क्षेत्र में किसी भी तरह के बड़े संघर्ष को समय रहते रोका जा सके। इस पूरे घटनाक्रम पर Gulfhindi.com की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीति ही एकमात्र रास्ता बचा है।

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