कतर ने बदला सुरक्षा नीति, अमेरिका पर निर्भरता खत्म कर क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता पर दिया जोर.

कतर सरकार ने अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा नीति में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसार ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य बलों की मौजूदगी अब लंबे समय की स्थिरता की गारंटी नहीं दे सकती है। 10 सितंबर 2026 और इससे पहले 7 सितंबर 2026 को दिए गए बयानों में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब गल्फ देशों को खुद आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर पूरी तरह से निर्भर रहना अब मौजूदा हालात में सही रणनीति नहीं है, खासकर जब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार टकराव चल रहा है।
अल उदीद एयर बेस पर हमले के बाद बदला माहौल
यह पूरा फैसला ईरान की तरफ से किए गए उन हमलों के बाद आया है जिनमें कतर को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में अल उदीद एयर बेस पर भी हमले की बात सामने आई थी। आपको बता दें कि यह बेस अरब दुनिया में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है और यहीं पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड का क्षेत्रीय मुख्यालय भी है। हालिया मिसाइल हमलों के बाद इस सैन्य ठिकाने पर सुरक्षा अलर्ट बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया है। इन घटनाओं के बाद कतर ने साफ शब्दों में अमेरिका को बता दिया है कि उसकी अपनी जमीन और आसमान का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के आक्रामक सैन्य अभियानों के लिए नहीं किया जाएगा।
खाड़ी देशों में उड़ानों और सुरक्षा को लेकर चिंता
इस तनावपूर्ण भू-राजनीतिक माहौल की वजह से खाड़ी के कई इलाकों में एयरस्पेस बंद करने पड़े हैं और क्षेत्र में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों के लिए भी सुरक्षा सलाह जारी की गई है। जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, अमेरिका के सैन्य और खुफिया हलकों में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि जब ईरान के साथ यह मौजूदा संघर्ष खत्म हो जाएगा, तो पश्चिम एशिया से अपनी सेनाओं को कुछ कम किया जा सकता है। हालिया मिसाइल हमलों ने अमेरिकी ठिकानों की जिन कमजोरियों को उजागर किया है, उसके बाद यह कदम उठाया जा रहा है।
भले ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसार ने यह माना कि कतर अभी भी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की इज्जत करता है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि बाहरी ताकतों और बार-बार होने वाले क्षेत्रीय तनावों के खतरों से बचने का एकमात्र रास्ता अपनी खुद की क्षेत्रीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना ही है। इस पूरी स्थिति का असर वहां रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों पर भी पड़ रहा है जिन्हें सुरक्षा और यात्रा को लेकर काफी सतर्क रहना पड़ रहा है।