बांग्लादेश में मौसम का कहर, रंगामती की कपताई झील में डूबा मशहूर झूलता पुल और पर्यटन ठप.

बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित चटगांव डिवीजन के तहत आने वाले प्रमुख पर्यटक स्थल रंगामती में भारी बरसात की वजह से जनजीवन और पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां की प्रसिद्ध लेक सिटी के नाम से मशहूर जगह पर कपताई झील पर बना ऐतिहासिक और खूबसूरत हैंगिंग ब्रिज यानी झूलता पुल पानी में पूरी तरह डूब गया है। पिछले कई दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश और पहाड़ी इलाकों से बहकर आए अतिरिक्त पानी के कारण इस कृत्रिम झील का जलस्तर बहुत तेजी से ऊपर आया है, जिसके चलते प्रशासन को आनन-फानन में सुरक्षा के कड़े कदम उठाने पड़े हैं।
सुरक्षा कारणों से प्रशासन का बड़ा कदम
हालात की गंभीरता को देखते हुए बांग्लादेश पर्यटन निगम ने किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए पर्यटकों के इस पुल के आसपास जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। सुरक्षा के मद्देनजर पुल के मुख्य प्रवेश द्वार पर लाल रंग का झंडा लगाया गया है और बांस की मजबूत बैरिकेडिंग करके रास्ता बंद कर दिया गया है। रंगामती टूरिज्म कॉर्पोरेशन के मैनेजर आलोक बिकास चकमा ने इस बात की पुष्टि की है कि लगातार हो रही बारिश और पहाड़ों से आए पानी की वजह से झील का जलस्तर बहुत बढ़ गया है, जिससे यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने साफ कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है, इसीलिए एहतियात के तौर पर यह रास्ता बंद किया गया है।
पर्यटकों में निराशा और स्थानीय कारोबारियों को भारी नुकसान
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस बात की जानकारी न होने के कारण दूर-दराज से रंगामती पहुंच रहे पर्यटकों को भारी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। यह 335 फीट लंबा खूबसूरत पुल इस झील के बीच स्थित दो पहाड़ियों को आपस में जोड़ता है और इसे रंगामती के पर्यटन का मुख्य प्रतीक माना जाता है। बहुत से सैलानी केवल इस अनोखे पुल को देखने के लिए ही यहां आते हैं। पुल के डूबने और बंद होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में होटल बुकिंग रद्द हो रही हैं, जिससे होटलों, मोटलों और रेस्तरां मालिकों को आर्थिक घाटा उठाना पड़ रहा है। एक स्थानीय होटल मालिक मोहम्मद सुमन मिया ने बताया कि इस स्थिति से पूरा होटल कारोबार ठप होने की कगार पर है।
नाव चालकों और दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट
पुल बंद होने का असर सिर्फ होटलों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय ट्रांसपोर्ट और छोटे दुकानदारों पर भी पड़ा है। स्थानीय बोट टर्मिनल पर इंजन वाली 100 से ज्यादा नावें इस समय पूरी तरह बेकार खड़ी हैं। इसके अलावा पारंपरिक कपड़े, स्थानीय टेक्सटाइल और हस्तशिल्प का सामान बेचने वाली दुकानें भी ग्राहकों के बिना बिल्कुल सूनी पड़ी हैं और दुकानदारों की बिक्री लगभग शून्य हो गई है। स्थानीय बोट ओनर्स एसोसिएशन के लीज होल्डर मोहम्मद फखरुल इस्लाम ने बताया कि पर्यटन का यह सीजन उनकी आजीविका के लिए साल भर में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि इसी सीजन की कमाई से उनके परिवारों का पूरे साल का खर्च चलता है, लेकिन अब कमाई पूरी तरह बंद हो जाने से उन्हें बहुत बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
झील और नए पुल के निर्माण को लेकर उम्मीदें
आपको बता दें कि यह झील बांग्लादेश की सबसे बड़ी कृत्रिम यानी मानव निर्मित झील है, जो कर्णफुली नदी पर बने कपताई बांध के कारण अस्तित्व में आई थी। इस बीच, रंगामती जिला परिषद के चेयरमैन दीपन तालुकदार दीपू ने बताया कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक नए पुल के निर्माण को लेकर पहले ही सर्वे कराया जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि ज्यादा ऊंचाई पर एक नए और आधुनिक पुल का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानियों से बचा जा सके।